टमाटर में झुलसा रोग की दवा क्या है | टमाटर में कौन सी दवा डालना चाहिए

tamatar mein jhulsa rog ki dava

टमाटर में लीफ माइनर की दवा | टमाटर में झुलसा रोग की दवा क्या है | टमाटर में कौन सी दवा डालना चाहिए | tamatar ki dawai | टमाटर की पत्तियों का सिकुड़ना | टमाटर के पौधे की देखभाल कैसे की जाती है | टमाटर में कितने प्रकार के रोग लगते हैं | टमाटर के रोग

टमाटर का अगेती झुलसा रोग बहुत ही खतरनाक बीमारी है. टमाटर में यदि एक बार यह बीमारी लग गई तो इस रोग से टमाटर को बचाना मुश्किल हो जाता है. और कुछ ही दिनों में टमाटर का पूरा खेत झुलसा रोग से ग्रसित नष्ट हो जाता है. टमाटर की खेती सर्दियों तथा गर्मियों में की जाती है बरसात में टमाटर की खेती नहीं कि जाती है, और टमाटर में झुलसा रोग की बात करें तो यह गर्मियों और सर्दियों दोनों मौसम में लगती है.

अगर टमाटर की फसल को सबसे अधिक नुकसान होता है तो वह है झुलसा रोग, गर्मियों में तो यह रोग कम लगता है परन्तु सर्दियों में टमाटर में झुलसा की समस्या अधिक देखने को मिलती है. टमाटर में लगने वाले इस झुलसा रोग से फसल को बचाने के लिए किसानों को समय रहते टमाटर में झुलसा रोग की दवा का स्प्रे करना चाहिए. और टमाटर के पौधे की देखभाल करते रहना चाहिए.

टमाटर में गलन रोग क्यों आती है?

टमाटर की खेती में यह खतरनाक रोग 3 कारण से होता है.

1अधिक सर्दी पड़ने या पाला पड़ने पर
2मौसम अधिक गर्म होने पर
3बेमौसमी बारिश होने पर

इन्हीं 3 कारणों से टमाटर में झुलसा रोग लगने की पूरी संभावना रहती है. तो तो दोस्तों आज हम आपको इस पोस्ट में यह बताने जा रहे हैं की टमाटर में झुलसा रोग की दवा क्या है और झुलसा रोग के लिए टमाटर में कौन सी दवा डालना चाहिए अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगे तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें. ताकि वे भी टमाटर की इस खतरनाक बीमारी से अपनी फसलों को बचा सकें.

सर्दियों में टमाटर में झुलसा रोग

सर्दियों के मौसम में टमाटर में झुलसा रोग की समस्या अधिक होती है क्योंकि कभी-कभी हफ्तों तक या इससे भी अधिक दिन तक कोहरा छाया रहता है. और कोहरा छाए रहने से पौधों को धूप नहीं मिल पाता है, तथा सारा दिन ओस भी फसलों पर बारिश की तरह पड़ा रहता है. ऐसी स्थिति में झुलसा जैसे भयानक रोग का आगमन होता है. इसके अलावा सर्दियों में टमाटर का अगेती झुलसा रोग भी बहुत खतरनाक होता है.

लगभग 15 जनवरी के बाद जब सर्दियाँ खत्म होने को होती हैं तो उस समय दिन में धूप के साथ तेज हवाएं चलती हैं और इन हवा में नमी बहोत अधिक होती है. तथा इन्हीं ठंड हवाओं के कारण शाम से लेकर पूरे रात पाला पड़ता है. और इस पाले को टमाटर की फसल सहन नहीं कर पाती है. फिर रातों रात पूरी फसल झुलसा रोग से ग्रसित हो जाती है जिससे किसान को भारी नुकसान होता है. इसे टमाटर का पछेता झुलसा रोग भी कहते हैं.

गर्मियों में टमाटर का अगेती झुलसा रोग

मई के महीने में जब बहोत तेज धूप निकलती है और दोपहर के समय गर्म हवा लू बनकर चलती है तो इस दौरान फफूंद का प्रकोप बढ़ जाता है फिर टमाटर में झुलसा रोग लग जाता है. इसलिए गर्मी में 1 दिन के अंतराल पर सिंचाई करना चहिये जिससे टमाटर के पौधे को गर्म हवा का असर कम होता है और झुलसा रोग लगने की संभावना थोड़ी कम हो जाती है.

बेमौसम बारिश से टमाटर में झुलसा रोग

कभी-कभी गर्मियों में और सर्दियों में आँधी-तूफान और बारिश हो जाती है. और टमाटर की फसल बारिश को सहन करने में सक्षम नहीं रहती है.

ऐसे में गर्मी हो या जाड़ा(सर्दी) इन सीजन में जो बारिश होती है वह बेमौसम बारिश होती है और यह बारिश कुछ फसलों के लिए तो अमृत के समान होती है लेकिन टमाटर की खेती के लिए जहर का काम करती है.

टमाटर में झुलसा रोग के लक्षण

Tomato me jhulsa rog का लक्षण यह है कि शुरुआत में टमाटर के ऊपरी भाग हरे भरे रहते हैं लेकिन नीचे जमीन की सतह से पत्तियां काले पड़ने शुरू ही जाते हैं. किसान को पता ही नहीं होता कि उनकी फसल में झुलसा रोग का आक्रमण हो चुका है उनको पता तब चलता है जब ऊपर की पत्तियां काले पड़ते हैं. और जब तक किसान को टमाटर में झुलसा रोग के बारे में पता चलता है उनकी पूरी फसल संक्रमित हो चुकी होती है.

टमाटर में झुलसा रोग की दवा

टमाटर में झुलसा रोग फफूंद के कारण होता, फफूंदी के कारण ही टमाटर में झुलसा रोग, धब्बा रोग, फलों का झड़ना, नर्सरी में छोटे पौधे का गलना इत्यादि रोग लगते हैं. अन्य फसलों की तरह टमाटर की फसल में तरह-तरह के रोग लगते हैं और उनसे फसल को बचाने के लिए किसान रासायनिक दवाओं का छिड़काव करते हैं. तो ऐसे में किसानों को चाहिए कि महीने में एक बार मेरिवान 10ml दवा प्रति 15 लीटर पानी मे घोल बनाकर टमाटर के पौधों पर स्प्रे करना चाहिए. या लूना एक्सपीरियंस 15ml दवा को 15 लीटर पानी मे मिलाकर छिड़काव करना चाहिए.

टमाटर में लीफ माइनर की दवा

टमाटर की खेती में लीफ माइनर भी एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है यह लीफ माइनर एक तरह का बहुत छोटा कीट होता है जो टमाटर की कोमल पत्तियों में सुरंग मनाकर रहती है. इस कीट से टमाटर की फसल को बचाने के लिए बायो AK 57 का 1ml दवाई 15 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करना चाहिए.

निष्कर्ष

तो तोस्तों आज के इस पोस्ट में हमने आपको बताया की टमाटर में झुलसा रोग की दवा क्या है. और फसल को इससे बचाने के लिए टमाटर में कौन सी दवा डालना चाहिए, क्योंकि अकसर देखा जाता है की बहुत से किसान टमाटर के रोग से बहुत परेशान रहते हैं. और जब तक उनको टमाटर की दवा का पता चलता है की किस दवा का स्प्रे करें. तब तक उनकी टमाटर की फसल बर्बाद होने के कगार पर आ जाती है.

तो दोस्तों आज के इस पोस्ट में बस इतना ही यदि आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें. ताकि वे भी टमाटर के रोग से अपने फसलों की रक्षा कर सकें, तो दोस्तों खेती-किसानी सम्बंधित ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारी पाने के लिए गूगल पर upagriculture.in टाइप करके सर्च करें. और पायें घर बैठे जानकारी.

FAQ:

Q: टमाटर में कौन कौन सी बीमारी आती है?

ANS: झुलसा रोग, धब्बा रोग, फलों का झड़ना, नर्सरी में छोटे पौधे का गलना, उखटा कवक, टमाटर का विल्ट इत्यादि.

Q: टमाटर में कौन सी दवा डालना चाहिए?

ANS: टमाटर में फूल आने के लिए शाइन, टमाटर के फटने के लिए बोरान, कीड़े के लिए महारथी, झुलसा के लिए मेरिवान, सफेद मक्खी के लिए इमिडा का स्प्रे करनी चाहिए.

Q: टमाटर की खेती कितने दिन की होती है?

ANS: रोपाई से लेकर 120 से 150 दिन की होती है.

Q: टमाटर में झुलसा रोग की दवा कौन सी है?

ANS: मेरिवान, लूना एक्सपीरियंस या ब्लूकापर.

Q: टमाटर का पौधा कितने दिनों में फल देता है?

ANS: रोपाई से 50 दिन बाद.

Q: टमाटर की अच्छी पैदावार के लिए क्या करें?

ANS: टमाटर की अच्छी पैदावार के लिए खेत को खरपतवार से मुक्त रखना चाहिए. तथा कैल्शियम, बोरान का उपयोग करना चाहिए.

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