मूली के साथ करें पालक, टमाटर, गोभी की मिश्रित खेती होगा अधिक मुनाफा, जानें पूरी जानकारी

मूली के साथ करें पालक, टमाटर, गोभी की मिश्रित खेती होगा अधिक मुनाफा, जानें पूरी जानकारी

मिश्रित खेती- सब्जियों की खेती से पैसे कमाने के लिए किसान तरह-तरह के तरीके अपनाते रहते हैं. लेकिन कुछ किसान तो उन तरीकों में सक्सेस हो जाते हैं और कुछ किसान फेल भी हो जाते हैं. मिश्रित खेती में फसलों के बीज तो अलग-अलग होते हैं. लेकिन खाद, पानी, कीटनाशक, परिश्रम यानि खेती की पूरी लागत एक बार ही बार लगते हैं. नमस्ते दोस्तों आज हम आपको बरसात में मूली की खेती से कमाई के लिए मूली की मिश्रित खेती करने के बारे में बताने जा रहे हैं. अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगे तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें.

मिश्रित फसल में क्या लाभ हैं?

अगर किसान किसी भी दो तरह की सब्जियों की मिक्स खेती करते हैं तो उससे किसानों को एक नहीं बल्कि अनेक लाभ होते हैं. जो इस प्रकार हैं-

  • अगर किसान दो सब्जियों की मिश्रित खेती करते हैं तो, एक ही सिंचाई से दोनों फसलों का काम चल जाता है.
  • मिश्रित खेती करने से किसानों को एक बार ही खाद देने दोनों फसलों की उर्वरक पूर्ति हो जाती है.
  • अगर कोई रोग या कीट लगते हैं तो, एक ही स्प्रे से दोनों फसलों की रक्षा होती है.
  • मिश्रित खेती करने से एक ही बार खरपतवार और निंदाई-गुड़ाई करने से दोनों फसलों को लाभ होता है.
  • दोनों फसलें एक साथ या बहुत कम अन्तराल में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं.
  • मिश्रित खेती करने से मिट्टी की उर्वरक शक्ति भी बनी रहती है.
  • इस तरह एक साथ दो फसलें लेने से किसानों को दोहरा मुनाफा मिलता है.

मिश्रित खेती कैसे की जाती है?

मिश्रित खेती एक ऐसी पद्धति है जिसमें दो या दो से अधिक फसलों की बुआई एक ही खेत में एक साथ की जाती है. इसके अलावा बहुत से किसान पशु-पालन को भी मिश्रित खेती की तरह करके दोहरा लाभ कमाते हैं. बहुत से किसान पशुपालन के साथ बकरी पालन या भेंड़ पालन करते हैं जिसे मिश्रित पशुपालन कहते हैं. अगर किसान फसलों की मिश्रित खेती करते हैं तो उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए की उन्हीं फसलों की मिश्रित खेती करें जिनकी बढ़वार लगभग बराबर होती हो.

पालक+मूली की मिश्रित खेती

बारिश के दिनों में पालक और मूली की मिश्रित खेती करके बहुत अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है. मुली और पालक ये दोनों ऐसी सब्जी हैं जिनकी बढ़वार बहुत अधिक नहीं होती है. इन दोनों सब्जियों की बढ़वार लगभग एक ही बराबर होती हैं. और अगर पालक के साथ मूली की मिश्रित खेती किया जाय तो ये एकसाथ मंडियों में बेचने के लिए तैयार हो जाते हैं. जिससे किसानों की कमाई डबल हो जाती है.

गोभी+मूली की मिश्रित खेती

अगर गोभी लगाने के समय ही मूली की बुआई की जाय तो, गोभी की बढ़वार होने से पहले ही मूली की कटाई हो चुकी होती है. इस तरह किसान को गोभी की कटाई से पहले मूली से एक्स्ट्रा कमाई होती है.

मूली+करेला की मिश्रित खेती

बारिश के मौसम में बहुत से किसान करेला की खेती मचान विधि द्वारा करते हैं. और निचे की पूरी जमीन खाली रहती. जिससे खाली खेतों में खरपतवार उग आते हैं. ऐसे में किसान इन खाली जगह में मूली की बुआई करते दोहरा मुनाफा कम सकते हैं. इस प्रकार मूली और करेला की मिश्रित खेती करने से खरपतवार की समस्या तो दूर होती ही है. साथ ही लगे हाथ खेत की निंदाई और गुड़ाई भी हो जाती है.

टमाटर+मूली की मिश्रित खेती

मात्र की रोपाई करने के बाद टमाटर की कतार से कतार के बीच में काफी जगह होती है. और जब तक वह जगह खाली रहता है तब तक किसान उसमें मूली की फसल ले सकते हैं. क्योंकि वैसे भी उन खाली जगह पर खरपतवार उग आते हैं. जिससे अनेक तरह के रोग और कीट उत्पन्न होते हैं.

पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. 1 वर्ष में किसी भूमि पर एक से ज्यादा फसल प्रणाली को क्या कहते हैं?

ANS- बहुविध फसल प्रणाली कहते है.

Q2. मिश्रित फसल कौन सी है?

ANS- गेहूं+सरसों, ज्वार+मुंग, उड़द+बाजरा, मुंग+मक्का इत्यादि.

Q3. किसानों के लिए मिश्रित खेती क्यों महत्वपूर्ण है?

ANS- मिश्रित खेती में श्रम का अधिक कुशलता से उपयोग करने, कृषि आदानों की खरीद के लिए नकदी का स्रोत रखने और फसलों या फसल उप-उत्पादों में अलग से मूल्य प्राप्त होता है.

Q4. मिश्रित फसल का क्या अर्थ है?

ANS- मिश्रित खेती में एक ही वरायटी के 2 से अधिक किश्मों को एक ही खाद, पानी और मेहनत में उगाया जाता है.

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