गेहूँ और सरसों की मिश्रित खेती करना सही या गलत, जानें पूरी जानकारी

गेहूँ और सरसों की मिश्रित खेती करना सही या गलत | mixed cultivation of wheat and mustard

अक्सर देखा जाता है की गाँव में रहने वाले किसान रबी की सबसे प्रमुख फसल गेहूँ और सरसों की खेती एक साथ करते चले आये हैं. भारत में गाँव के किसानों द्वारा गेहूँ और सरसों की मिश्रित फसल उगाने की यह परम्परा बहुत पुराने समय से चला आ रहा है. गेहूँ और सरसों की मिश्रित से जहाँ एक तरफ एक साथ दो फसल उगाने से लाभ होता है वहीँ अगर थोड़ी सावधानी न रखा जाय तो इनके नुकसान भी होते हैं. तो दोस्तों चलिए आज के इस पोस्ट में हम आपको बताते हैं की गेहूं के साथ सरसों की खेती करना सही या गलत है. अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगे तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें.

गेहूँ और सरसों की मिश्रित खेती करने के लाभ

गेहूं और सरसों की खेती करने से किसानों को यह लाभ होता है की एक ही खाद, बीज, पानी और मेहनत से किसानों को एक साथ दो फसल प्राप्त हो जाती है. लेकिन यदि किसान भाई इसका लाभ लेना कहते हैं तो उनको सरसों की फसल गेहूं के खेत के चारो ओर केवल मेड़ पर करनी चाहिए. परन्तु अगर पुरे खेत में गेहूं के साथ सरसों की बुआई करते हैं तो इसके नुकसान भी किसानों को उठाना पड़ सकता है.

गेहूँ और सरसों की मिश्रित खेती करने के नुकसान

गेहूं और सरसों की खेती एक साथ करने से लाभ के साथ किसानों को हानि भी बहुत अधिक होती है. इसका कारण यह है की सरसों की फसल गेहूं से बड़ी होती है. और जब गेहूं की फसल में फुल आते हैं तो उस समय गेहूं के पौधे को सूर्य के प्रकाश की बहुत ही आवश्यकता होती है. ऐसे में सरसों की फसल के छाँव से गेहूं के पौधे को पर्याप्त प्रकाश नहीं मिल पाता है. जिससे गेहूं की पदावर बहुत कम हो जाती है. इसलिए किसानों को चाहिए की गेहूं के साथ सरसों की फसल केवल खेत के चारो ओर मेड़ पर ही करनी चाहिए.

गेहूँ और सरसों की मिश्रित खेती में नीलगाय से नुकसान

गाँव में आज भी नीलगाय से किसानों को बहुत नुकसान होता है. ऐसे में अगर गेहूं के साथ सरसों की बुआई की जाती है तो सरसों की फसल बड़ी होने से नीलगाय सरसों की आड़ पाकर गेहूं के खेत में अपना डेरा बना लेते है. और वे फसल को पैरों से कुचलकर बहुत नुकसान पहुंचाते हैं. कुछ किसान भाइयों से पता चला है की नीलगाय सरसों की आड़ पाकर उसी में लेटकर सोते हैं. जिससे वहां की फसल सड़ जाती है.

गेहूँ और सरसों की मिश्रित खेती में रोग और कीटों से नुकसान

सरसों की फसल में जब फूल आने का समय होता है तब माहू कीट का प्रकोप देखने को मिलाता है. ऐसे में ये कीट व्यर्थ में गेहूं की फसल को भी कुछ हद तक नुकसान तो पहुंचाते ही हैं. साथ ही माहू से फसल को बचाने के लिए पुरे खेत में कीटनाशक का छिड़काव करना पड़ता है. जिससे किसानों की मेहनत और लागत दोनों बढ़ जाती है.

FAQ:

Q1. रबी में सबसे कम पानी की फसल कौन सी है?

ANS. सरसों, चना, मसूर, तीसी.

Q2. सरसों की बुवाई का सही समय क्या है?

ANS. सरसों की बुवाई 15 अक्टूबर से 25 अक्टुबर तक कर देनी चाहिए.

Q3. गेहूं की बुवाई कौन से महीने में की जाती है?

ANS. 25 अक्तूबर से नवंबर तक.

Q4. गेहूं की फसल कितने दिनों में तैयार हो जाती है?

ANS. 120-130 दिन में तैयार हो जाती है.

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