(Matar ki Kheti-2022-23) क्या बारिश के मौसम में मटर की खेती की जा सकती है?

मटर की खेती में इसके बीजों को अंकुरित होने के लिए 20 से 22 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरत होती है. तथा इनके फलियों में भरपूर दाने बनने के लिए 10 से 15 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है. चूँकि Hari matar ki kheti के लिए ठंढ की जरुरत होती है, इसलिए बारिश के मौसम में मटर की खेती नहीं की जा सकती है?

सर्दियों में Matar ki kheti एक प्रमुख फसल है, मटर एक दलहनी फसल है. इसे सुखाकर इसके दाने को दो भागों में करके इसका दाल बनाकर भोजन के रूप में उपयोग किया जाता है तथा हरे मटर का उपयोग सब्जी बनाने के काम में लिया जाता है. सर्दियों में मटर की मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है.

मटर की खेती में सिंचाई भी बहुत कम करनी पड़ती है. नमस्कार दोस्तों आज हम आपको इस पोस्ट में सर्दियों में हरी Matar ki kheti के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं. अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगे तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें.

(Matar ki Kheti-2022) क्या बारिश के मौसम में मटर की खेती की जा सकती है?
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2 सब्जी वाली मटर की खेती के लिए अनुकूल जलवायु

Green matar ki kheti

मटर की फसल आमतौर पर सर्दियों में उगाई जाने वाली फसल है. सर्दियों के सीजन में हरी मटर की डिमांड बहुत अधिक रहती है. वैसे तो मटर की खेती लगभग सभी रज्यों में उगाई जाती है लेकिन उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, हरियाणा, हिमांचल प्रदेश में बड़े पैमाने पर की जाती है. मटर का उपयोग भोजन के रूप में कई तरीके से की जाती है जैसे- दाल बनाने, सब्जियाँ बनाने, चुरा-मटर बनाने, नमकीन बनाने के काम में लिया जाता है.

सब्जी वाली मटर की खेती के लिए अनुकूल जलवायु

तापमान अधिक होने पर मटर की फलियों में दाने नहीं बनते हैं. और साथ ही बारिश होने से भी मटर की फसल को बहुत नुकसर होता है. इसलिए मटर की खेती के लिए सर्दियों का मौसम अनुकूल और उत्तम होता है. Matar ki kheti के लिए 25 अक्तूबर के बाद से लेकर नवंबर महीने तक का मौसम बहुत ही अच्छा होता है. मटर के बीजों को अंकुरित होने के लिए 20 से 22 डिग्री सेल्सियस तापमान अच्छा होता है. लेकिन इनके फलियों में भरपूर दाने पड़ने के लिए 10 से 15 डिग्री सेल्सियस तापमान बहुत ही लाभदायक होता है.

मटर की अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी

देखे जाय तो किसान लगभग सभी प्रकार की मिट्टी में Matar ki kheti करते हैं और उसमें उपज भी अच्छी होती है. लेकिन चिकनी तथा बलुई मिट्टी जिसका PH मान 6 से 7.5 हो मटर के अच्छे उत्पादन के लिए बहुत ही उत्तम होती है.

मटर की उन्नत किस्में

उन्नत प्रजातिउत्पादन/हेक्टेयरपकने की अवधि
अर्कल10 से 13 कुंतलपहली तुड़ाई 50 से 60
रचना15 से 20 कुंतल130 से 140 दिन
काशी शक्ति13 से 15 कुंतलपहली तुड़ाई 70 से 75
पंजाब 8830 से 35 कुंतल100 दिन
पंत मटर 15515 कुंतल130 दिन
एपी-335 कुंतलपहली तुड़ाई 70 में
अर्ली बैजर15 कुंतलपहली तुड़ाई 60 दिन में
मालवीय मटर-220 से 23 कुंतल130 से 140 दिन
आजाद मटर-115 कुंतलपहली तुड़ाई 60 दिन
जवाहर मटर-115 से 17 कुंतलपहली तुड़ाई 70 दिन
आजाद मटर-310 से 14 कुंतलपहली तुड़ाई 70 दिन

मटर के लिए खेत की तैयारी तथा खाद की मात्रा

Matar ki kheti में बुआई से पहले किसान भाइयों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की मटर की बुआई कभी भी पुराने नमी में नहीं करनी चाहिए. यानि बुआई करने से पहले खेत को नौफार से गहरी जुताई करके कुछ दिनों तक छोड़ दें,

उसके बाद 1 ट्राली गोबर की सड़ी खाद खेत में बिखेर कर खेत की पलेवा कर देनी चाहिए, इसके बाद जब खेत पक जाय तब अच्छी उपज लेने के लिए अंतिम जुताई के समय प्रति एकड़ 30 किलो यूरिया और 35 किलो DAP डालनी चाहिए.

मटर की बुआई के लिए बीज की मात्रा

मटर की बुआई करने के लिए 1.5 से 2 किलो बीज प्रति बिस्से के हिसाब से जरुरत होती है यानि 1 बीघे खेत में 35 से 40 किलो बीज की आवश्यकता होती है. इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए की अधिक बीज डालने दे फसल घने हो जाते हैं. जिससे पैदावार में बहुत कमी देखने को मिलती है. इसलिए अगर आप Matar ki kheti से अच्छी पैदावार चाहते हैं तो बीज की मात्रा का ध्यान देना बहुत आवश्यक है.

मटर का बीजोपचार

फसल उत्पादन में बढ़ोत्तरी तथा जमीन में लगने वाले रोगों से मटर की फसल को बचाने के लिए बीजों को उपचारित करना भुत ही आवश्यक होता है. ऐसे में किसान भाइयों को चाहिए की 3 से 5 ग्राम बाविस्टिन या थिरम से प्रति किलों मटर के बीज को उपचारित करना चाहिए. ऐसा करने से रोग कम लगते हैं तथा उत्पादन बढती है.

बीज उपचार करने का तरीका

बहुत से किसान भाइयों को यह नहीं पता होता है की फसलों के बीजों को बुआई करने से पहले उपचारित कैसे किया जाय. तो इसके लिए सबसे पहले मटर के बीजों को किसी छायादार स्थान में किसी प्लास्टिक के पात्र या बर्तन में बीजों को हल्का पानी का छींटा मारकर बीजों को भिगों लेना चाहिए, उसके बाद 3 से 5 ग्राम दवा की मात्रा को बीजों पर बुरकाव करके हांथों से बीजों में मिलाना चाहिये.

जब सभी बीजों में दवा लग जाय तब बीजों को छाया में ही फैलाकर सुखाना चाहिए. इसके बाद बीजों की बुआई करनी चाहिए. लेकिन इस बात का ध्यान रखना चाहिए की बीजोपचार हमेशा छायेदार स्थान में और प्लास्टिक के पात्र में ही करना चाहिए.

मटर बोने की विधि

मटर की बुआई करने के लिए मुख्य खेत को पूरी तरह से तैयार होने के बाद उन्नत बीजों की खेत में छीटाई करने के बाद रोटावेटर से खेत की जुताई करनी चाहिए. ध्यान रहे की बीज जनीं में अधिक गहराई में न बोई जाएँ. और साथ ही अच्छे अंकुरण के लिए खेत में पर्याप्त नमी भी हो.

इसके अलावा कुछ किसान खेत को अच्छी तरह से तैयार करने के बाद कुदाल से लाइन खींचकर भी मटर की बुआई करते हैं. कुदाल से बुआई करने पर प्रति एकड़ बीज की मात्रा कम लगती है जबकि ट्रेक्टर से बुआई करने पर बीज अधिक लगते हैं.

मटर कि खेती में खरपतवार नियंत्रण

मटर की बुआई करने के 25 से 30 दिन बाद यदि खरपतवार दिखाई दे तो खुरपी की सहायता से निकाल देना चाहिए. पौधे बड़े होने पर जब खेत मटर की फसल से ढक जाती है तब खरपतवार नहीं लगते हैं. साथ ही कुछ मटर के बीज की किस्में ऐसे होती हैं जिनकी गुड़ाई करनी पड़ती है. अतः इसके लिए बुआई के 15 दिन बाद कुदाल से गुड़ाई कर देनी चाहिए.

मटर की खेती में सिंचाई

सबसे पहले तो किसान भाइयों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की बुआई से पहले खेत में पर्याप्त नमी होना चाहिए. इसके बाद मटर में पहली सिंचाई की जरुरत तब पड़ती है जब इसमें फूल आने की समय होता है. और दूसरी सिंचाई की जरुरत तब पड़ती है जब मटर की फलियों में दाने भरने का समय आता है. पहली सिंचाई करने के बाद फसल में हल्की यूरिया का छिड़काव कर देना चाहिए.

मटर की तुड़ाई और कटाई

Matar ki kheti में हरे मटर की 2 तुड़ाई की जाती है. पहली तुड़ाई में उपज अच्छी मिलती है. तथा दूसरी तुड़ाई में उपज थोड़ी कम होती है. हरे मटर की तुड़ाई तब करनी चाहिए जब फलियों में दाने पूरी तरह से भर जाएँ. इससे मंडियों में इनके भाव अधिक मिलते हैं. और अगर दाल के लिए मटर की तुड़ाई करनी हो तो, मटर की कटाई उस समय करनी चाहिए जब मटर की फसल पककर उसकी फलियाँ आधे से ज्यादा सुख जाएँ. फिर इनकी मड़ाई करके दाने को अलग कर लेना चाहिए.

Matar ki kheti में लागत

दोस्तों Matar ki kheti में लागत की बात करें तो इसके बीजों पर निर्भर करता है की इनके प्रति किलो बीज की कीमत क्या है. तो दोस्तों अगर आपको इनके बीज 120 रुपये किलो मिलते हैं तो इस प्रकार एक बीघे खेत के लिए 40 किलो बीज की कीमत 4800 रुपये आती है. और जुताई, खाद, बीज को लेकर लगभग 7000 रुपये की लागत 1 बीघे में आती है.

मटर की खेती से लाभ

हरी Matar ki kheti में लाभ की बात करें तो इनके बाजार भाव पर निर्भर करता है की मंडियों में प्रति कुंतल हरे मटर के भाव क्या है. फिर भी अगर कम से कम 2500 रुपये प्रति कुंतल के भाव से मटर बिकते हैं और अगर एक बीघे में 10 कुंतल उपज होती है तो इस हिसाब से 25000 रुपये की कमाई होती है और अगर 3000 रुपये प्रति कुंतल के भाव से मटर बिकते हैं तो 10 कुंतल मटर से 30000 की कमाई होती है और लागत काटने पर 20 से 25000 रुपये की मुनाफा हो जाता है.

लगने वाले रोग, कीट व उपचार

रतुआ रोग– Matar ki kheti इस रोग के कारण पौधे हल्के से चमकदार पीले फफोले नजर आते हैं पत्तियों की निचली सतह पर ये ज्यादा होते हैं. यह रोग पिछेती फसलों में लगती है. अतः इससे बचने के लिए अगेती फसल बोने चाहिए, अवरोधी प्रजाति की बुआई करनी चाहिए.

आर्द्रजड़ गलन- इसमें पत्तियाँ पत्तियाँ नीचे की ओर मुड़कर हल्के पीले रंग की हो जाती है. यह तब देखने को मिलता है जब 22 से 30 डिग्री में सेल्सियस तापमान होता है. इससे फसल को बचाने के लिए कार्बेन्ड़ाजिम 1 ग्राम + बाविस्टिन 2 ग्राम से बीज को शोधित करना चाहिए. साथ ही लूना का 1ml/1 लिटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करना चाहिए.

मृदुरोमिल फफूंद- इस रोग से पत्तियों की ऊपरी सतह पर पीले और उनके नीचे की सतह पर रुई जैसी फफूंद छा जाती है और पौधों की बढ़वार प्रभावित होती है. इससे बचने के लिए 1.5 ग्राम मौन्कोजेब 1 लिटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए.

तना मक्खी- ये मक्खियाँ पत्तियों, डंठलों के कोमल तनों में गांठें बनाकर मक्खी उनमें अपने अंडे देती है. और इनके बच्चे टनों में सुरंग बनाकर अंदर-अंदर खाती है जिस वजह से पौधे कमजोर होकर हो जाते हैं. इनसे निपटने के लिए करेन्ट 5ml/15 लिटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करना चाहिए.

मांहू- यह बहुत छोटे कीट होते हैं. इनका प्रकोप तब होता है जब सरसों में फूल आने का समय होता है. ये फसल में जहरीले तत्व छोड़ते हैं. इनके प्रकोप से Matar ki kheti को बचाने के लिए इमिडाक्लोरोपिड का स्प्रेकारना चाहिए.

FAQ-

Q1. मटर की खेती कौन से महीने में की जाती है?

ANS. रबी सीजन की अक्तूबर-नवम्बर महीने में.

Q2. मटर की खेती कितने दिन में तैयार हो जाती है?

ANS. हरी मटर के लिए पहली तुड़ाई 60 से 70 दिन में और दाल के लिए 130 से 140 दिन में तैयार होती है.

Q3. मटर में कौन सा खाद डाला जाता है?

ANS. Matar ki kheti में यूरिया, DAP, गोबर की सड़ी खाद दिया जाता है.

Q4. एक बीघा में मटर का बीज कितना पड़ता है?

ANS. 35 से 40 किलो.

Q5. मटर के खेत में कितना पानी चाहिए?

ANS. Matar ki kheti में 2 से 3 पानी देना चाहिए, पहली सिंचाई फूल आते समय, दूसरी सिंचाई की जरुरत तब पड़ती है जब मटर की फलियों में दाने भरने का समय होता है.

Q6. क्या बारिश के मौसम में मटर की खेती की जा सकती है?

ANS. नहीं.

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