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सोयाबीन, लौकी, टमाटर में लीफ माइनर की दवा

सोयाबीन, लौकी, टमाटर में लीफ माइनर की दवा | leaf miner pest control

लीफ माइनर- बदलते समय के अनुसार कृषि के क्षेत्र में नए-नए कृषि उपकरण, बीज, कीटनाशक और खाद का अविष्कार होता रहता है. और इसी प्रकार फसलों में तरह-तरह के रोग और कीट भी उत्पन्न होते रहते हैं. और सभी रोग और कीटों से फसलों को बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिक भी रिसर्च करते रहते हैं.

तो दोस्तों आज हम आपको फसलों में लगने वाले एक और खतरनाक कीट लीफ माइनर्स(पत्ती सुरंगक) के बारे में बताने जा रहे हैं. अन्य कीटों की तरह यह भी कहने और देखने में भले ही बहुत छोटा होता है. लेकिन अगर एक बार ये फसल में लग जाती हैं, तो इनके प्रकोप से फसल उत्पादन में 60% तक की कमी होती है. तो दोस्तों चलिए हम जानते हैं की सोयाबीन, लौकी, टमाटर इत्यादि फसलों को लीफ माइनर से कैसे बचाएँ. अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगे तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें.

लीफ माइनर कीट और रोग क्या है

लीफ माइनर बहुत ही छोटे कीट होते हैं यह टमाटर, खीरा, ककड़ी, नेनुआ, गेंदा, सोयाबीन इत्यादि लगभग सभी फसलों की पत्तियों के अंदर सुरंग बनाकर रहते हैं. इसे गाँव के लोग पत्ती सुरंगक कीट भी कहते हैं, जिन भी फसलों में इनका आक्रमण होता है. उस फसल की पत्तियों पर टेढ़े-मेढ़े सफेद धारीयां बनी दिखाई देती हैं.

दरसल ये कीट होती तो हैं पत्तियों के अन्दर लेकिन ये अन्दर ही अन्दर पत्तियों को हानि पहुंचाते रहते हैं. और पत्तियों पर सफेद धारीयां बन जाती हैं जिससे यह पता चलता है की उस फसल में लीफ माइनर कीट का अटैक हो चूका है.

लीफ माइनर का जीवन चक्र

इन कीटों जीवन चक्र मादा मक्खियों के द्वारा चलता है. मादा मक्खी पौधों की पत्तियों की कोशिकाओं के अन्दर अंडे देती है. अंडे देने के 2 से 3 दिनों के अंदर ही ये अंडे प्रस्फुटित होना शुरू हो जाते हैं. जब अंडे पूरी तरह से फूट जाते हैं तब इनमें से निकली छोटी-छोटी इल्लियाँ पत्तियों के अंदर सुरंग बनाकर पत्तियों के अन्दर उपस्थित हरित पदार्थ को खाना शुरू कर देती हैं.

ये इल्लियाँ हरित पदार्थ को अन्दर ही अंदर खाती हुई आगे बढ़ती रहती हैं जिससे लीफ माइनर कीट से ग्रस्त पत्तियों पर फसलों टेढ़ी-मेढ़ी आकार की संरचनाएं बनी हुई दिखाई देती हैं. अगर इन्हें पत्तियों को तोड़कर देखा जाय तो यह पीले काली रंग की होती हैं. इनका जीवन चक्र इतना तेज चलता है की 1 साल में इनकी कई पीढ़ियां पाई जाती हैं.

लीफ माइनर का ऑर्गेनिक उपचार

लीफ माइनर कीट से फसलों को बचाने के लिए इन कीटों के प्रकोप के शुरुआत में ही यदि संभव हो तो पत्ती सुरंगक पत्तियों को तोड़कर निकाल देना चाहिए. इसके बाद यदि इनका ज्यादा प्रकोप दिखाई दे तो नीम का तेल 3ml प्रति 15 लीटर पानी में घोल बनाकर 10 दिनों के अन्तराल पर छिड़काव करना चाहिए.

स्टीकर का प्रयोग

फसलों को हानि पहुँचाने वाले कीटों को आकर्षित करने के लिए तरह-तरह के रंग बिरंगे स्टीकर मिलते हैं जिन्हें एक एकड़ खेत में 8 से 10 स्टीकर लगाने चाहिए. इन स्टीकरों में चिपकने वाला पदार्थ लगा होता है और जब भी खेतों मक्खियाँ आती हैं तो रंग-बिरंगे स्टीकर की ओर आकर्षित होकर जाती हैं और चिपक जाती हैं. इस प्रकार लीफ माइनर कीट से फसलों को बचाया जा सकता है.

लीफ माइनर की दवा

लीफ माइनर का अटैक अक्सर फसलों की नाजुक यानि कोमल पत्तियों पर देखने को मिलता है. इनके प्रकोप से पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया प्रभावित होती हैं. जिससे इसका सीधा असर पौधे के विकास पर पड़ता है. अब इसके रासायनिक उपचार की बात करें तो bio-AK57 की 1ml दवा को 15 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कर देना चाहिए.

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