बरसात में लौकी की खेती कैसे करें और लौकी के पौधे की देखभाल कैसे करें

बरसात में लौकी की खेती कैसे करें और लौकी के पौधे की देखभाल कैसे करें | lauki ki kheti kaise karen

लौकी की खेती पुरे साल रबी, खरीफ व जायद सीजन में की जाती है. लेकिन अधिक सर्दियों में लौकी की खेती पर बुरा प्रभाव पड़ता है. इसलिए अधिक ठंढ से लौकी की फसलों को बचाना चाहिए. यह एक ऐसी सब्जी है जिसे समतल खेत में या पेड़-पौधे, मचान बनाकर या घर की छतों पर भी इसकी खेती बहोत आसानी से की जा सकती है. तो नमस्कार दोस्तों आज हम आपको इस पोस्ट में बताने जा रहे हैं की बरसात में लौकी की खेती कैसे करें तथा लौकी की अधिक पैदावार के लिए क्या करें. अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगे तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें.

लौकी की खेती कौन से महीने में की जाती है?

जैसा की हमने आपको बताया की Lauki ki kheti रबी, खरीफ व जायद सीजन में की जाती है. तो दोस्तों अगर आप रबी सीजन में लौकी की खेती करना चाहते हैं तो आपको बीजों की बुआई मध्य सितम्बर से मध्य अक्तूबर तक करनी चाहिए और यदि आप खरीफ सीजन में लौकी की खेती करना चाहते हैं तो लौकी के बीजों की बुआई मध्य जून से मध्य जुलाई तक करनी चाहिए तथा जायद में लौकी खेती करना चाहते हैं तो सर्दियों को ख़त्म होने के बाद जनवरी के अंतिम सप्ताह से लेकर मध्य फरवरी तक करना चाहिए.

लौकी का सबसे अच्छा बीज कौन सा है?

विभिन्न राज्यों में तरह-तरह के लौकी की उन्नत किश्में पायी जाती हैं. और उन राज्यों के लिए उन बीजों की अपनी एक अलग भूमिका होती है. साथ ही रबी, खरीफ व जायद सीजन के लिए भी अलग-अलग लौकी की प्रजातियाँ होती हैं. लेकिन आपको केवल उन्हीं प्रजातियों के बीजों की बुआई करनी चाहिए जो आपके क्षेत्र तथा जलवायु के हिसाब से अच्छी मानी जाती हो. अपने क्षेत्र के लिए अनुकूल लौकी के बीजों जानकारी के लिए आप अपने नजदीकी कृषि बीज की दुकानों से संपर्क कर सकते हैं.

लौकी में कौन सी खाद डालें?

लौकी की खेती लाइन बनाकर कतार में की जाती है या मिट्टी की पिंडी बनाकर की जाती है. इसलिए लौकी की खेत में खेत की अंतिम जुताई के समय 1 ट्राली गोबर की खाद या मुर्गियों की सड़ी खाद बिखेरकर मिट्टी में मिला देना चाहिए. तथा DAP, पोटाश और यूरिया को तिन भागों में बाँटकर बीज बुआई से पहले, कल्ले निकलते समय तथा फूल आते समय पौधों के पास देकर मिट्टी चढ़ा देनी चाहिए.

लौकी को कैसे लगाया जाता है?

अगर आप बरसात में लौकी की खेती करना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको मचान बना लेनी चाहिए क्योंकि बारिश में जमीन के स्पर्श से लौकी के फलों में दाग बन जाते हैं जो मंडियों में बेचने के लायक नहीं होते हैं. इसलिए बरसात में मचान बनाकर लौकी को ऊपर चढ़ाकर इसकी खेती करनी चाहिए. तथा एनी सीजन में आप लौकी खेती जमीन पर कर सकते हैं.

अब बात आती है लौकी के बीजों को लगाने की तो अगर आप खरीफ सीजन में लौकी की खेती करना चाहते हैं आपको पिंडी बना लेनी चाहिए और प्रत्येक पिंडी पर 5 से 7 बीजों की बुआई करें. और अगर आप जमीन पर लौकी की खेती करना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले लाइन से कतार बना लेनी चाहिए और प्रत्येक कतार पर 1 फिट की दूरी पर लौकी के बीजों की बुआई करनी चाहिए.

लौकी की खेती कितने दिन में तैयार हो जाती है?

लौकी की बुआई करने के 55 से 60 दिन के बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती हैं. लौकी के फलों की तुड़ाई 1 दिन के अन्तराल पर की जाती है. अगर लौकी के तुड़ाई के इस अंतराल को 1 से 2 दिन कर दिया जाय तो इनके फल बहुत बड़े, मोटे तथा कड़े हो जाते हैं. जिनकी मंडियों में कीमत आधे से भी कम हो जाती है. इसलिए लौकी की खेती में इसकी तुड़ाई का ख़ास ध्यान रखना चाहिए.

लौकी में फल लाने के लिए क्या करें?

लौकी में जल्दी से फल लेने के लिए सिंचाई हल्की तथा कुछ देर से करनी चाहिए. अधिक पानी देने से लौकी की शाखाएँ बहुत तेजी से बढ़ते हैं. और इनमें फुल और फल देरी से आते हैं. अतः जब तक लौकी के पौधे में फूल और फल अच्छी तरह आना प्रारम्भ न हो जाएँ तब-तक उचित मात्रा में सिंचाई करना चाहिए.

लौकी के फूल क्यों गिरते हैं?

लौकी के फूल गिरने के कई कारण होते हैं जैसे- अधिक सिंचाई, अधिक तापमान, कम तापमान, अनुकूल बीजों का न होना, पोषक तत्वों की कमी ऐसे कई सारे वजह होते हैं जिसके कारण लौकी के फूल गिरते हैं. और इसका सीधा असर लौकी के उत्पादन पर पड़ता है. अतः किसानों को इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए लौकी के फूलों को गिरने से रोकने के लिए 10 ml प्रति 15 लिटर पानी में शाइन तथा 15 ml प्रति 15 लिटर पानी में लूना फफुन्दनाशक का छिड़काव करना चाहिए.

लौकी में कौन कौन से रोग लगते हैं?

सफ़ेद मक्खी- ये बहुत ही छोटे सफ़ेद कीट होते हैं. ये फसलों की कोमल पत्तियों के रस को चूसकर कमजोर बना देती है. और ये विषाणु को भी फैलाती है. सफ़ेद मक्खी से फसल को बचाने के लिए इमिडाक्लोरोपिड 1ML प्रति 15 लिटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करना चाहिए.

पत्ती खाने वाले कीड़े- लौकी में फूल आने के समय हरे रंग के पत्ती खाने वाले कीड़ों का हमला देखने को मिलता है. दिन में पत्तियों के निचे छुपे रहते हैं और रात के अँधेरे में निकलकर कोमल पत्तियों को खाते है. इनसे लौकी की फसल को बचाने के लिए प्रोफेक्स सुपर 1.5 ml प्रति 15 लिटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करना चाहिए.

फल सड़न रोग- अक्सर देखा जाता है की लौकी के छोटे फल सड़ने लगते हैं और बड़े फलों में काले रंग के दाग बन जाते हैं. जिससे उपज में काफी कमी हो जाती है. लौकी को सड़ने तथा दाग से बचाने के लिए मिराडोर 15 ml प्रति 15 लिटर पानी में घोल बनाकर 12 दिनों के अन्तराल पर स्प्रे करना चाहिए.

Q1. लौकी कितने दिनों में फल देने लगती है?

ANS. बुआई करने के 55 से 60 दिन के बाद लौकी फल देने लगती है.

Q2. लौकी के बीज कितने दिन में अंकुरित होते हैं?

ANS. रबी और खरीफ में लगाईं गई लौकी के बीज 7 से 8 दिन में अच्छी तरह से अंकुरित हो जाते हैं. तथा जायद सीजन में बोई गई लौकी के बीजों में अंकुरण थोड़ी देर से होती है. जो लगभग 12 से 15 दिन में अंकुरित होती है.

Q3. लौकी कौन से महीने में उगाई जाती है?

ANS. रबी सीजन में लौकी की खेती मध्य सितम्बर से मध्य अक्तूबर तक. खरीफ सीजन में लौकी की खेती मध्य जून से मध्य जुलाई तक तथा जायद में लौकी खेती जनवरी के अंतिम सप्ताह से लेकर मध्य फरवरी तक उगाई जाती है.

Q4. लौकी में कौन सा इंजेक्शन लगाया जाता है?

ANS. ऑक्सीटोसिन.

ये भी पढ़ें.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here