इन कृषि यंत्रों पर मिलेंगे 50 प्रतिशत अनुदान जल्दी करें आवेदन

कम समय तथा कम श्रम में अधिक उत्पादन के लिए खेती-बाड़ी और बागवानी में कृषि यंत्रों की बहुत बड़ी भूमिका है। खेती के आधुनिक उपकरण को किसानों तक पहुँचाने के लिये सरकारें कृषि यंत्रों पर अनुदान का लाभ किसान भाइयों को प्रदान करती रहती हैं. तो आइये जानते हैं की किसानों को कृषि यंत्रों पर मिलेंगे 50 प्रतिशत अनुदान .

नमस्कार किसान भाइयों आज हम आपको मध्य प्रदेश सरकार द्वारा दिए जा रहे न्यूमेटिक प्लांटर, हे रेक, बैकहो ट्रैक्टर चलित, पावर हैरो, पशु निवारक बायो अकास्टिक यंत्र, बेलर तथा हैप्पी सीडरसुपर सीडर कृषि यंत्रों पर सब्सिडी के बारे में बताने जा रहे हैं. यदि आप भी कृषि यंत्रों पर अनुदान लेना चाहते हैं. तो इस पोस्ट को जरुर पढ़ें.

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इन कृषि यंत्रों पर मिलेंगे 50 प्रतिशत अनुदान(agricultural machines subsidy 50 percent)

1- न्यूमेटिक प्लांटर(National Pneumatic Planter Information)

सीडड्रिल मशीन जैसी दिखने वाली इस मशीन में सेंट्रीफ्यूगल ब्लोअर लगा होता है. जो हवा के दबाव से बीज को उठा कर बीज बोने का कार्य करता है. इस यंत्र से सभी प्रकार के बीजों की बोआई सफलतापूर्वक की जाती है. न्यूमेटिक प्लांटर को चलाने के लिए ट्रैक्टर की आवश्यकता होती है, इस मशीन से एक बार में एक से ज्यादा फसलों की बुआई की जा सकती है. इस मशीन से पौधे से पौधे की दूरी तथा पॅक्ति से पॅक्ति की दूरी बुआई से पहले निर्धारित करके बीज की बुवाई की जा सकती है।

न्यूमैटिक प्लांटर से किसानों को लाभ(Advantages of Pneumatic Planter)

इस मशीन से खेतों में बोआई करते समय बीज को बगैर नुकसान पहुंचाए एक समय में एक जगह पर एक ही तथा बराबर गहराई में बीज गिराता है. और इसमें बीजों को छूटने एवं एक साथ 2 बीज गिरने की सम्भावना बहुत कम होती है. न्यूमैटिक प्लांटर मशीन से समय की बचत, मजदूरी में कमी, बीज बोआई में होने वाला खर्च कम, बीजों की बचत तथा एकसमान बुआई करने पर अच्छी पैदावार होती है.

2- पशु निवारक बायो अकास्टिक यंत्र(Animal Preventive Bioacoustic Equipment)

पशु निवारक बायो अकॉस्टिक यंत्र कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को उनकी फसलों की सुरक्षा के लिए अनुदान में उपलब्ध कराया जा रहा है। पशु निवारक बायो कास्टिक यंत्र एक ऐसा यंत्र है, जो नीलगाय, जंगली सुअरों व आवारा पशुओं और पक्षियों को उन्हीं की भाषा में डराने का काम करता है। और नीलगाय व आवारा पशुओं को बिना कोई नुकसान पहुंचाए फसलों की रखवाली करता है.

कुछ इस बायो अकास्टिक यंत्र को नीलगाय भगाने की मशीन, बंदर भगाने की झटका मशीन और सुअर भगाने की मशीन भी कहते हैं. इस बायो अकास्टिक मशीन में विभिन्न पक्षियों और जंगली तथा पालतू जानवरों, तेंदुए, बाघ और कुत्ते आदि की आवाजें रिकार्ड की हुई होती है जिनसे जानवर और पक्षी डर कर खेत से दूर भाग जाते हैं।

पशु निवारक बायो अकॉस्टिक मशीन का निर्माण भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान परिषद के विशेषज्ञों ने किसानों की फसलों को हिंसक जंगली पशुओं से बचाने के लिए किया है. बायो अकास्टिक यंत्र 22 प्रकार के जानवरों और पक्षियों को खेत से दूर रखने में कारगर पाया गया है। बैटरी से संचालित होने वाली यह यंत्र 10 से 12 घंटे बैटरी बैकअप देती है. इसके अलावा इस यंत्र को सोलर एनर्जी और बिजली से भी संचालित किया जा सकता है। ये खेत के 7 से 10 एकड़ तक का क्षेत्र कवर करता है। जरूरत के अनुसार इसमें समय भी निर्धारित किया जा सकता है की इसे दिन में चलाना है या रात में या फिर पुरे 24 घंटे चलाना है।

इस मशीन में एक लाउड स्पीकर की तरह एक यंत्र लगा होता है। जिससे बहुत तेज जानवरों या पक्षियों की आवाज निकलती है, जिससे सब जानवर दूर भागते हैं. जिस क्षेत्र में बायो-एकॉस्टिक मशीन लगाना होता है वहाँ कंपनी के कर्मी जाकर निरीक्षण करते हैं कि उस क्षेत्र में किस जानवर का आतंक अधिक है। निरीक्षण करने के बाद janwar wali machine में परेशान करने वाले जानवरों की आवाज को इंस्टॉल कर देते है। उसके बाद मशीन चालू करने पर समय समय पर जानवरों की आवाज सुनाई देने लगती है। जिससे खेत के आस पास से जानवर भाग जाते हैं।

3- पावर हैरो कृषि यंत्र(Power harrows – Agricultural machinery)

यह एक आधुनिक कृषि उपकरण है जिसका उपयोग बीज की बुआई(seeding) के लिए खेत की तैयारी करने के लिए किया जाता है. पावर हैरो(Power Harrow) मिट्टी की गहराई से जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बनाने का काम करता है. क्योंकि देखा जाता है की किसान जब भी कोई फसल लेते हैं, तो पर फसल की कटाई (harvesting) के बाद खेत की मिट्टी काफी सख़्त(कठोर) हो जाती है. ऐसे में यदि किसान साधारण तरीके से खेतों की जुताई करते हैं तो मिट्टी के बड़े-बड़े ढेले बनते है. जिसके कारण अगली फसल की बुआई ठीक से नहीं हो पाती है. लेकिन पावर हैरो कृषि यंत्र मिटटी की गहराई से जुताई करके एक ही बार में खेत को भुरभुरी बना देता है.

पावर हैरो मशीन से लाभ(Advantages of Power Harrow)

  • पावर हैरो मशीन मिट्टी को पलटने का काम करता है.
  • पावर हैरो खेत की मिट्टी को अच्छे से बारीक़ तथा भुरभुरी करता है.
  • इससे जुताई करने पर मिट्टी पर दबाव कम होता है जिसे फसलों की जड़ों का विकास अच्छा होता है.
  • अधिक गहरी जुताई के कारण मिट्टी में पानी का रिसाव अच्छा होता है, जिससे मिट्टी में नमी लम्बे समय तक बनी रहती है.
  • खेत की पूर्व फसल के अवशेष व खरपतवार को पावर हैरो यंत्र जमीन में दबा देता है, जो जैविक खाद बन जाती है.
  • गहरी जुताई करने से जड़ें मजबूत होने से फसल अच्छी होती है.
  • tractor power harrow का उपयोग गेहूं, गन्ना, सोयाबीन, धान, कपास, आलू ऐसी बहुत सी फसलों के लिए इसका इस्तेमाल होता है.
  • इस मशीन को 45h.p. ट्रैक्टर की मदद से चलाया जा सकता है.
  • पावर हैरो मिट्टी की गहराई से जुताई कर एक ही बार में उसे भुरभुरा बनाता है। इस तरह किसान का समय और पैसा, दोनों ही बचता है.

4- हैप्पी सीडर(happy seeder machine)

कृषि को सरल और आसान बनाने के लिए समय के अनुसार कृषि क्षेत्र मे नए-नए कृषि यंत्रों का अविष्कार होता रहा है. और अब सरकार ने धान की पराली को किसानों द्वारा खेतों में आग लगाने की समस्या को देखकर हैप्पी सीडर व सुपर सीडर कृषि यंत्र पर अनुदान देने का निर्णय लिया है.

मध्यप्रदेश, उड़ीसा, पंजाब, हरियाणा, उतरप्रदेश, छतीसगढ़ आदि क्षेत्रों के किसान धान की कटाई के बाद खेत मे कम्बाइन हार्वेस्टर चलाते है, लेकिन फिर भी खेतों मे 1 फिट के लगभाग पराली खड़ी रहती है | ऐसे में पराली को बिना जलाए हैप्पी सीडर सुपर सीडर कृषि यंत्र से गेहूं की बुआई हो जाती है. इस Happy super seeder machine मशीन से गेहूं की बिजाई करने पर खर्चा कम तथा पैदावार अधिक होता है।

इस खेती के आधुनिक उपकरण के प्रयोग से धान की पराली का सही उपयोग होता है. इससे धान के बचे अवशेष खेत मे सड़कर देशी खाद बन जाते है. सुपर सीडर यंत्र के प्रयोग किसानों को एक साथ दो लाभ होते है. (1) खेत की जुताई और (2) अगली फसल की बुआई. हो जाती है.

मध्य प्रदेश के किसानों के लिए सरकार सुपर सीडर यंत्र पर 50% सब्सिडी मुहैया करा रही है. अगर सुपर सीडर प्राइस की बात करें तो यह ₹2,00000 – 2,50,000 के तक मिलती है.

5- बेलर मशीन(baler machine agriculture)

धान की कटाई करने के बाद धान की पराली को लेकर किसानों की एक समस्या बनी रहती है. यदि पराली को खेत में जलाते हैं तो खेत की मिट्टी की उर्वरता कम होने के साथ उसमें उपस्थित फास्फोरस, पौटेशियम, सल्फर, नाइट्रोजन जैसे तत्वों की कमी हो जाती है. साथ ही वायु प्रदूषण भी होता है. ऐसी परिस्थिति में बेलर मशीन किसानों के लिए बहुत कारगर साबित हुआ है। यह राउंड बेलर यंत्र पराली को काटकर उसका गोल आकार में रोल बना देती है. पराली से बने इस रोल से किसानों को कुछ कमाई हो जाती है और खेतों की उपजाऊ शक्ति भी बनी रहती है.

6- हे – रेक कृषि यंत्र(hey rack)

हे-रेक एक ऐसा खेती से सम्बंदित कृषि यंत्र है जो खेत से धान के बचे पराली या फसल के बचे हुए अवशेषों, घास या पुआल को लाईन में इकठ्ठा करने का काम करता है. इस हाय रेक कृषि यंत्र को नार्मल ट्रैक्टरों जैसे 25-35 एचपी ट्रैक्टर से भी चलाया जा सकता है. इस हे रेक मशीन को चलाने के लिए केवल ट्रैक्टर के पीछे कनेक्ट करना होता है, और ट्रैक्टर आगे बढ़ने के साथ यह स्वयं चलता है.

बैकहो ट्रैक्टर चलित ( 35 एचपी से अधिक ट्रैक्टर हेतु )Tractor Backhoe Loader

अक्सर देखा जाता है की बहुत से किसान भाइयों के पास ट्रैक्टर होते हुए भी उन्हें अपने खेतों में गड्ढ़े खोदने, भारी-भरकम बोझा उठाने जैसी बहुत से कार्यों के लिए जेसीबी का सहारा लेते है. लेकिन अब किसान अपने ट्रैक्टर में बैकेहो लोडर जोड़कर 35 एचपी से अधिक सभी ट्रैक्टर को मिनी जेसीबी बनाकर अपने खेती-बाड़ी को और आसन बना सकते हैं. इसे चलाने के लिए स्टेरिंग की आवश्यकता नहीं पड़ती बल्कि इसे लीवर्स के माध्यम से हैंडल किया जाता है.

बैकेहो लोडर में क्रेन या जेसीबी की तरह लीवर लगे होते हैं। इस मशीन में एक तरफ लोडर लगा होता है, जो सामान उठाने, गड्ढा खोदने, भारी समान को दूसरी जगह ले जाने जैसी बहुत से कार्यों के लिए काम करता है. जिसे कहीं काफी मिट्टी पड़ी है तो उसका इस्तेमाल किया जाएगा। 35 एचपी ट्रैक्टर के लिए बैकहो पर सब्सिडी प्रदान की जा रही है.

कृषि यंत्रों पर सब्सिडी प्राप्त करने हेतु आवश्यक दस्तावेज (Agricultural Machines Subsidy )

  1. आवेदक के आधार कार्ड की कॉपी
  2. बैंक पासबुक की प्रथम पेज की कॉपी
  3. आवेदक का मोबाइल नंबर
  4. (अनुसूचित जाति एवं जनजाति के किसान) जाति प्रमाण पत्र जो की सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किया गया हो
  5. भूमि के लिए बी-1,
  6. ट्रेक्टर चालित यंत्रों के लिए ट्रेक्टर की आरसी

कृषि यंत्रों पर मिलेगी सब्सिडी (Agricultural Machines Subsidy )

मध्यप्रदेश में अलग-अलग वर्ग के श्रेणीवार किसानों को इन कृषि यन्त्र पर 40 से 50% तक का अनुदान दिए जाने का प्रावधान चल रहा है। इच्छुक कृषक अपने अभिलेखों के साथ योजना से सम्बंधित अधिक जानकारी के लिए अपने जिले के सहायक कृषि यंत्री कार्यालय या कृषि भवन में संपर्क कर सकते हैं।

कृषि यंत्रों पर सब्सिडी लेने हेतु यहाँ करें आवेदन

मध्यप्रदेश में कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए आवेदन किसान ऑनलाइन https://dbt.mpdage.org/ पोर्टल पर कर सकते हैं. ऑनलाइन आवेदन करने पर इसमें जिस किसान का सेलेक्सन होगा उनको बहुत कम कीमत में कृषि मशीन मिलेंगे. इन 7 कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत अनुदान लेने के लिए आप घर बैठे मोबाइल से भी अप्लाई कर सकते हैं.

इसके अलावा किसान अपने जिले के सहायक कृषि यंत्री कार्यालय में संपर्क करके ऑफलाइन आवेदन भी कर सकते हैं. इन यंत्रों हेतु जिलेवार लक्ष्यों की आवश्यकता नहीं होगी। कृषक की मांग के अनुसार लक्ष्य तत्काल आवंटित कर दिया जाएगा.

पूछे जाने वाले प्रश्न(FAQ)

Q. सब्सिडी लेने के लिए हमें पहले यन्त्र खरीदना पड़ेगा क्या?

A. अगर लोटरी में नाम आता है तो आप कृषि यंत्र खरीदकर सब्सिडी ले सकते हैं.

Q. भूमि माता-पिता के नाम है तो क्या खुद का फॉर्म भर दिया जाय तो कोई दिक्कत तो नहीं होगी?

A. जिसके नाम से भूमि है उसी के नाम से ही आवेदन करना होगा.

Q. ये किस राज्य के लिए है?

A. m.p.(मध्य प्रदेश).

Q. क्या ट्रेक्टर के द्वारा चलने वाले कृषि यंत्रों के लिए ट्रेक्टर होना आवश्यक है?

A. हाँ ट्रेक्टर होना जरूरी है क्योंकि अप्लाई करते समय ट्रेक्टर की आरसी देनी होती है.

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