मुनाफा देगी कम पानी वाली फसल | kam pani me hone wali fasal

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भारत एक कृषि प्रधान देश होने के नाते यहाँ की अधिकांश आबादी खेतीबाड़ी पर निर्भर है. फिर भी यहाँ बहुत से इलाकों में फसलों की सिंचाई के लिए पानी की समस्या होती है. हमारे देश में बहुत से किसान वर्षा पर आश्रित होकर खेती करते हैं तो बहुत से किसान नहरों में आने वाली पानी पर आश्रित रहते हैं.

मुनाफा देगी कम पानी वाली फसल | kam pani me hone wali fasal

ऐसे में होता यह है की कभी-कभी समय से बारिश नहीं होता है या फिर समय से नदियों में पानी नहीं आता है तो पानी की आभाव के कारण इसका असर फसलों के उत्पादन पर पड़ता है. जिससे फसल की पैदावार में भारी कमी देखने को मिलती है.

अतः किसान भाइयों को चाहिए की ऐसे फसलों की बुआई करें जो कम पानी में उगने वाली फसल हों. और देखा जाय तो बहुत सी ऐसी फसलें हैं जिनको अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है.

सबसे कम पानी की फसल कौन सी है

उतैला या उर्द की खेती

यह गर्मियों तथा बरसात दोनों मौसमों में उगाया जाता है. ये एक दाल वाली फसल है तथा ये कम पानी की आवश्यकता वाली फसलें हैं. अतः जिन किसान भाइयों के यहाँ फसलों की सिंचाई के लिए पानी की समस्या होती हो, उनके लिए यह फसल बहुत अच्छी मानी जाती है.

अरहर की खेती

यह बारिश में उगाई जाने वाली फसल है. बुआई से लेकर कटाई तक इसमें 8 से 9 महीने तक का समय लगता है.

बाजरा और ज्वार की खेती

ज्वार और बाजरा की खेती भी बरसात में ही किया जाता है. यह लगभा 4 महीने पककर तैयार हो जाती है.

मूंग की खेती

यह गर्मी की दाल वाली फसल है. इसे गर्मियों के मौसम में बोया जाता है. इसमें सिंचाई बहुत ही कम किया जाता है.

चना की खेती

इसकी खेती सर्दियों में किया जाता है. इसे दाल और बेसन के रूप में उपयोग किया जाता है. अगर सिंचाई की बात करें तो, यदि बुआई करते समय मुख्य खेत में पर्याप्त नमी हो तो इसमें एक भी सिंचाई की जरूरत नहीं होती है. और बुआई के लगभग 150 दिन बाद पककर तैयार हो जाती है.

अलसी या तीसी की खेती

उत्तर प्रदेश में अलसी को तीसी कहा जाता है. इसकी खेती सर्दियों के मौसम में किया जाता है. चने की तरह इसमें भी सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है. यह भी बुआई के 150 दिन बाद पककर तैयार होती है.

मक्का की बुआई

मक्का की खेती बरसात के मौसम में किया जाता है. इसे भुट्टा या जोन्हरी भी कहा जाता है. इस फसल में भी सिंचाई बहुत कम करनी पड़ती है. कुछ राज्यों में इसकी खेती गर्मियों में भी किया जाने लगा है. ट्रेनों में या दुकानों में इसके सूखे भुने हुए लावे को बेचा जाता है जिसे पापकार्न कहते हैं.

तिल की बुआई

यह तिलहन की फसल है. इसके दानो से मशीनों द्वारा पेराई करके तेल निकाला जाता है. इसकी खेती बरसात के महीने में की जाती है. इसे बहुत कम सिंचाई की आवश्यकता होती है.

सरसों की खेती

इसकी खेती सर्दियों में की जाती है. इस राई या सरसो के नाम से जाना जाता है. यह भी तिल की फसल की तरह kam pani wali fasal है.

कम सिंचाई वाली फसल सह फसलें
अरहरज्वार
अरहरबाजरा
उर्दज्वार
अरहरतिल

FAQ:

Q: सबसे जल्दी तैयार होने वाली फसल कौन सी है?

ANS: खीरा, ककड़ी, पालक, तरबूज, धनिया आदि

Q: पानी की अधिक आवश्यकता वाली फसल कौन सी है?

ANS: धान, मक्का, केला, ईख आदि.

Q: कौन सी फसल में सबसे कम पानी का इस्तेमाल होता है?

ANS: तिल्ली, अरहर, उर्द, मुंग, अलसी, चना आदि.

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