फसलों के लिए 500 ml-नैनो यूरिया किस प्रकार सहायक है, जानें कीमत, फायदे और उपयोग की विधि

फसलों के लिए नैनो यूरिया किस प्रकार सहायक है, जानें कीमत, फायदे और उपयोग की विधि

नैनो यूरिया एक तरल पदार्थ है, जबकि पुराना यूरिया जिसका किसान सालों से उपयोग करते चले आये हैं वह दानेदार और सफ़ेद रंग का होता है. कृषि के क्षेत्र में नैनो लिक्विड यूरिया का एक अहम् हिस्सा है. यह दानेदार यूरिया की अपेच्छा सस्ती होने के साथ-साथ खेतों में उर्वरकों की जरूरत को भी पूरा करने में बहुत उत्तम सिद्ध हुआ है.

कृषि यंत्र, खाद, बीज, पानी और कीटनाशक ये पांच चीजें खेतीबाड़ी के लिए बहुत ही जरुरी होती हैं. ऐसे में किसानों की फसलों को स्वस्थ रखने तथा फसल उत्पादन और गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए IFFCO ने नैनो तरल यूरिया का अविष्कार किया है. कृषि विशेषज्ञों ने भी नैनो तरल यूरिया के उत्पादन और गुणवत्ता को देखते हुए मुहर लगा दी है.

नैनो यूरिया की कीमत क्या है

नैनो यूरिया की प्राइस की बात करें तो यह दानेदार यूरिया से सस्ती है. नैनो तरल यूरिया की 500ml की कीमत की बात करें तो यह 240 रुपये में मिल जाती है. जो 1 एकड़ खेत के लिए पर्याप्त है. जबकि पुराने जमाने की दानेदार यूरिया की कीमत इस समय 280 से लेकर 320 रुपये में उपलब्ध है.

दानेदार यूरिया की एक बैग खाद लगभग एक बीघा खेत में उपयोग किया जाता है, जो नैनो तरल यूरिया की अपेच्छा मूल्य में तो मंहगा है ही साथ ही खेत में इस्तेमाल करने में भी महंगी साबित हो रही है. इस प्रकार नैनो तरल यूरिया किसानों के पैसे की बचत तो करती ही है साथ पर्यावण भी सुरक्षित रह्र्गा.

नैनो यूरिया का प्रयोग कैसे करें किसान

नैनो यूरिया एक तरल उर्वरक है इसलिए इसका फसलों पर स्प्रे मशीन से छिड़काव किया जाता है. नैनो तरल यूरिया का अच्छा लाभ लेने के लिए निचे दिए गए चार्ट को जरुर देखें.

1 लीटर पानी में 2 से 4 ml नैनो यूरियाफसलों के विकास के समय स्प्रे करें
पहला छिड़कावफसलों में कल्ले निकलते समय
दूसरा छिड़कावफसलों में फूल आने का समय

इफको नैनो यूरिया के उपयोग की विधि

  • इसका स्प्रे ओस में नहीं करना चाहिए.
  • सुबह ओस में छिड़काव करने से इसका प्रभाव कम हो जाता है.
  • इफको नैनो लिक्विड यूरिया को उपयोग करने से पहले बोतल को अच्छी तरह हिला लेना चाहिए.
  • फसलों की पत्तियों पर एक समान छिड़काव के लिए कटे हुए नोजल का प्रयोग करें.
  • नैनो यूरिया के स्प्रे करने से 12 घंटे के पहले सुनिश्चित कर लें बारिश नहीं होनी चाहिए.
  • इसका छिड़काव किसी भी फसल पर किया जा सकता है.

नैनो तरल यूरिया कैसे करता है काम

नैनो तरल यूरिया पत्तियों पर इसका छिड़काव करने के बाद यह बहुत ही सरलता से कोशिका रंध्रों और अन्य छिद्रों की सहायता से पौधे में चला जाता है और पौधों की कोशिकाओं द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है. नैनो तरल यूरिया के छिड़काव के बाद आवश्यकता से बचे हुए अप्रयुक्त नाइट्रोजन पौधे के रिक्तिका में स्टोर रहते हैं. और जब पौधे के उचित विकास और वृद्धि का समय आता है तब धीरे-धीरे फसल इसे ग्रहण करते हैं.

नैनो यूरिया में नाइट्रोजन की मात्रा

पारंपरिक यूरिया की बढ़ती किल्लत को आसान बनाने के लिए उसके स्थान पर नैनो यूरिया संयंत्र को विकसित किया गया है. नैनो तरल यूरिया की 500 मिली. की एक बोतल में 40,000 मिलीग्राम/लीटर नाइट्रोजन की मात्रा होती है, जो परम्परिक सामान्य यूरिया के एक बोरी के बराबर नाइट्रोजन पोषक तत्त्व फसलों को प्रदान करता है. फसलों पर इसका उपयोग पारंपरिक यूरिया की आवश्यकता को न्यूनतम 50 प्रतिशत तक कम कर सकता है.

नैनो यूरिया और यूरिया में क्या अंतर है

इफको नैनो यूरिया और दानेदार यूरिया में अंतर इस प्रकार है.

नैनो यूरियादानेदार यूरिया
इसका घोल बनाकर फसलों पर स्प्रे होता हैइसका खड़ी फसल या खाली खेत में बुरकाव होता है
नैनो यूरिया से फसल को 90% नाइट्रोजन मिलता हैदानेदार यूरिया से फसल को 30% नाइट्रोजन मिलता है
इसका पूरा असर फसलों को होता हैइसका कुछ भाग हवा में उड़ जाता है
यह किसानों के लिए सस्ती हैयह थोड़ी महंगी है

FAQ=

Q1- नैनो यूरिया का प्रयोग कैसे किया जाता है?

ANS- 1 लीटर पानी में 2 से 4 ml नैनो यूरिया का पानी में घोल बनाकर फसलों पर छिड़काव किया जाता है.

Q2- नैनो यूरिया खाद में कीटनाशक मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं की नही.

ANS- नैनो यूरिया को ऐसे उर्वरक में मिलाना चाहिए जो 100% पानी में घुलनशील हो.

Q3- नैनो लिक्विड यूरिया कहां से एवं कैसे मिलेगा?

ANS- इफको नैनो लिक्विड यूरिया किसी भी दुकान से या ऑनलाइन भी ख़रीदा जा सकता है.

Q4- क्या नैनो यूरिया इंसानों के लिए हानिकारक है?

ANS- नैनो यूरिया उपयोग के लिए अनुशंसित है और मनुष्यों के अलावा जानवरों, पक्षियों और मिट्टी में उपस्थित जीवों के लिए भी सुरक्षित है.

Q5- नैनो यूरिया लिक्विड की खोज किसने की है?

ANS- जोधपुरवासी वैज्ञानिक डॉ. रमेश रलिया ने किया था. जिसे इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको) ने 31 मई को किसानों को समर्पित किया.

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