[Top-5] गेहूं की उन्नतशील किस्में 2023- बम्पर पैदावार के लिए गेहूं की प्रजातियाँ

अक्टूबर महीने में धान की कटाई करने के बाद किसान गेहूं की बुआई करने की तैयारी करते हैं. जब किसानों को गेहूँ की बुआई करने का समय आता है तब गेहूँ की अधिक पैदावार देने वाले किश्मों का चयन करने में बहुत परेशानी होती है क्योंकि आजकल बाजार में अच्छे ब्रांड के नाम से ख़राब किश्मों की गेहूं के बीज भी आने लगे हैं. ऐसे में किसानों को गेहूँ की कुछ नई किस्मों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं जिससे अधिक पैदावार मिलेगी. तो दोस्तों चलिए हम जानते हैं की गेहूँ की वह उन्नत किश्में कौन सी हैं.

गेहूं की बम्पर पैदावार के लिए किसान करें इन किश्मों की बुआई, पढ़ें पूरी खबर | gehu ki unnat kisme

गेहूं की नई किश्मों की खासियत

उन्नत किश्मों की बुआई करके अधिक से अधिक पैदावार लेने किसानों की एक जिज्ञासा होती है जिससे वे भी अपनी उत्पादों को बेचकर अच्छा मुनाफा कमा सकें. और कृषि वैज्ञानिक भी किसानों की तमन्ना पूरा करने के लिए फसलों की नई-नई किश्में विकसित करते रहते हैं.

इस वर्ष किसानों को गेहूं की फसल से अत्यधिक उत्पादन लेने के लिए विशेषज्ञों ने देश भर में गेहूँ की ऐसी प्रजातियाँ निकाली हैं जो रोग प्रतिरोधी होंगी. और गेहूँ की पैदावार बहुत अधिक होंगी. इस वर्ष तो ये किश्में सभी किसानों को उपलब्ध नहीं हो पाएंगी लेकिन आगामी गेहूँ की सीजन में पुरे देश में किसानों को बहुत आसानी से मिल सकेंगीं.

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गेहूँ की यह उन्नत किश्म देश के उत्तर पूर्व क्षेत्र के मैदानी सिंचित भूमि बुआई के लिए अनुकूल बयाता गया है. यह गेहूं की ऐसी किश्म है जो देर से बोई जाती है. गेहूँ की यह किश्म भी पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की तरफ से लांच की गई है. इस किश्मों की बुआई से पैदावार तो अधिक मिलेगी ही साथ ही इस गेहूँ के आटे में भरपूर प्रोटीन भी मिलेगी जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होगा

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गेहूं की यह किश्म मोटे दानों वाली है. इन किश्मों की बुआई सिंचित बुआई के लिए बहुत ही अनुकूल है. पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने इस प्रजाति को दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हिमांचल प्रदेश, जम्मू, उत्तराखंड तथा उत्तर पश्चिम के मैदानी इलाकों में खासतौर पर 3 वर्ष की सफल परिक्षण के बाद सिंचित बुआई के तहत लागू की है. जो पैदावार के मामले में बहुत ही बेहतर है. गेहूँ के इस किश्म की बुआई पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, बिहार जैसे मैदानी इलाकों में भी करके अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.

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पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी द्वारा लांच की गई गेहूँ की यह किश्म भी सिंचित भूमि जैसे इलाकों के लिए अनुकूल बताया गया है. यह किश्म सबसे अगेती बोई जाने वाली फसल है. गेहूं की यह किश्म पीबीडब्ल्यू 872 देश के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र के किसानों को बुआई के लिए अनुकूल बताया गया है. जिससे बहुत अधिक उत्पादन लिया जा सकता है.

अधिक पैदावार देने वाले गेहूं की अन्य किश्में

उन्नत किश्मेंपकने की अवधिउत्पादन/हेक्टेयर
करण नरेन्द्र145 दिन65 से 75 कुंतल
पूसा यशस्वी130 दिन55 से 65 कुंतल
करन वंदना120 दिन70 से 75 कुंतल
कारण श्रिया130 दिन52 से 55 कुंतल
डीडीडब्ल्यू 47125 दिन70 से 74 कुंतल

पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न1. गेहूं का जनक कौन सा देश है?

उत्तर- सबसे पहले गेहूँ का जनक तुर्की, पूर्वी इराक, जॉर्डन, सीरिया को माना जाता है.

प्रश्न2. सर्वप्रथम गेहूं की खोज कब हुई थी?

उत्तर- गेहूँ की खोज सर्वप्रथम दक्षिण पूर्व तुर्की में 10,000 साल पहले हुई थी.

प्रश्न3. अधिक पैदावार देने वाली सबसे अच्छा गेहूं का बीज कौन सा है?

उत्तर- पीबीडब्ल्यू 833, पीबीडब्ल्यू 872, करण नरेन्द्र, करन वंदना, डीडीडब्ल्यू 47 इत्यादि.

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