रासायनिक खाद के दाम बढ़ने से अब महंगी हुई खेतीबाड़ी

आसमान छू रही कच्चे तेल की महंगाई की मार खेतीबाड़ी का कारोबार कर रहे किसान भाइयों के जेब पर पड़ रहा है. पेट्रोल डीजल के बढ़ते दामों की वजह से सभी वस्तुएं लगातार महंगी होती चली जा रही हैं. और इसी बीच रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध रुकने का नाम नहीं ले रहा है.

पुरे विश्व में रूस ही एक ऐसा देश है जो किसानों के लिए फ़र्टिलाइज़र सप्लाई करता है. और अब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध की वजह से इसका असर देश के किसानों को भुगतना पड़ रहा है. इस युद्ध की वजह से रासायनिक खाद की कीमत में 285 रुपए तक की बढ़ोत्तरी देखने को मिली है.

रूस और यूक्रेन युद्ध से किसान परेशान

जैसा की अभी मार्च का महिना चल रहा है और किसान अपने खेतों में खीरा, ककड़ी, खरबूजा, टमाटर, भिन्डी, गर्मी की बैंगन, नेनुआ, लौकी इत्यादि सब्जियां लगा चुके हैं. और इन सब्जियों की अच्छी ग्रोथ के लिए एवं अधिक पैदावार के लिए किसान भाई अपने खेतों में अधिकतर रासायनिक फ़र्टिलाइज़र का प्रयोग करते हैं.

लेकिन इन दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध की वजह से रासायनिक खाद 285 रुपए महंगे हो गए हैं. यदि यह युद्ध ऐसे ही कुछ दिनों चलता रहा तो इन खादों के दामों में और उजाफा हो सकता है. और इसका असर भारत के तमाम छोटे और गरीब किसानों को भुगतना पड़ सकता है.

रासायनिक खाद की कीमतों में आई तेजी

जिस प्रकार पेट्रोल डीजल में महंगाई बढ़ी हुई है उसी तरह रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध की वजह से भारत की अर्थवयवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ने की सम्भावना हो रही है. फरवरी महीने में DAP के दाम 1350 रुपये प्रति बैग थे. और इसके फुटकर रेट 28 रूपये प्रति किलो थे.

लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच हो रहे युद्ध से DAP के दाम महंगे हो गए हैं. और अब इसके फुटकर रेट की बात करें तो 28 रूपये प्रति किलो से बढ़कर 34 रूपये प्रति किलो पहुँच गई है. फ़र्टिलाइज़र की बढ़ती इस महंगाई का असर न सिर्फ किसान की जेब पर पड़ेगी, साथ ही फसल की पैदावार पर भी पड़ेगी.

फसलों के लिए खाद भूमिका

रासायनिक उर्वरक फसलों की अच्छी पैदावार तथा बेहतर गुणवत्ता के लिए बहुत बड़ा योगदान है. आज किसानों के द्वारा खेतों में सबसे अधिक रासायनिक उर्वरक प्रयोग किये जाते हैं. और इससे किसान भाइयों को काफी लाभ भी मिलता है.

इन रासायनिक खादों के इस्तेमाल से खेतों में मिटटी की उर्वरक क्षमता काफी बढ़ जाती है जिससे फसलों का अच्छा विकास तो होता ही है. साथ ही पौधों की गुणवत्ता बढ़ने के साथ बम्पर पैदावार भी होती है.

किसान क्या करें

किसान भाइयों को रासायनिक खादों के साथ-साथ अब खेतों में देशी खाद को बढ़ावा देना चाहिए. अब फसलों में किसान भाइयों को अपने खेतों में गोबर की खाद, बकरियों की खाद, हरी खाद या मुर्गियों की खाद का प्रयोग करना चाहिए.

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