डेयरी फार्मिंग में काम आने वाले उपकरण और उनके उपयोग

डेयरी फार्मिंग में काम आने वाले उपकरण और उनके उपयोग

खेतीबाड़ी के साथ-साथ पशुपालन करना किसानों का पहला धर्म है. आज शायद ही कोई ऐसा किसान होगा जिनके पास गाय या भैंस न हो, और वर्तमान में देखे जाय तो डेयरी फार्मिंग मुनाफे का जरिया बनता चला जा रहा है. ऐसे में भारत की सरकार भी डेयरी फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए डेयरी फार्मिंग पर सब्सिडी प्रवाहित करती है.

हमारे देश में दूध की इतनी कमी है की आजकल शादी-विवाह और दुकानों पर बनने वाली मिठाइयों में दूध का नकली पाउडर मिलाया जाने लगा है. आजकल दूध से बनाये जाने वाले जितन्र भी खाद्य पदार्थ होते हैं उनमें 60% मिलावट होती है. इसे देखते हुए डेयरी फार्मिंग बिजनेस शुरू करना पशुपालक किसानों के लिए पैसे कमाने का एक बहुत ही अच्छा अवसर उबरकर सामने आया है.

ऐसे में अगर कोई पशुपालक डेयरी फार्मिंग का बिजने करना चाहते हैं तो सबसे पहले उनको डेयरी फार्मिंग में काम आने वाले उपकरण और उनके उपयोग के बारे जानकरी रखना बहुत आवश्यक है. क्योंकि इन उपकरणों के बिना डेयरी फार्मिंग शुरू करना आसान नहीं होगा, तो दोस्तों चलिए जानते हैं की डेयरी फार्मिंग में काम आने वाले उपकरण और उनके उपयोग किस प्रकार पशुपालकों के लिए सहायक है.

डेयरी फार्मिंग में काम आने वाले उपकरणों के नाम

  • पशु आवास उपकरण
  • धुंध शीतलन प्रणाली
  • हरा चारा काटने की मशीन
  • फीड ग्राइंडर मिक्सर मशीन
  • भूसा बनाने वाली मशीन
  • दूध दुहने की मशीन
  • दूध रखने का बालटा
  • दूध सेपरेटर

डेयरी फार्मिंग में काम आने वाले उपकरणों के उपयोग

बदलते समय के अनुसार कृषि के साथ अन्य सभी क्षेत्र में मजदूरों की समस्या बढ़ती जा रही है. और इन समस्याओं को पूरा करने के लिए मशीनों का उपयोग बहुत तेजी से बढ़ता चला जा रहा है. जहाँ डेयरी फार्मिंग चलाने के लिए कई मजदूरों की आवश्यकता पड़ती थी अब वहाँ आधुनिक यंत्रों की सहायता से बहुत सरलता से सभी कामों को निपटाया जाने लगा है. तो चलिए जानते हैं की डेयरी फार्मिंग में काम आने वाले उपकरणों का उपयोग कैसे किया जाता है.

पशु आवास उपकरण

जिस तरह मनुष्य आपने रहने के लिए घर की ब्यवस्था करते हैं. उसी तरह पशुओं के लिए भी अच्छे तथा साफ-सुथरे आवास की जरुरत होती है. इनका आवास ऐसी जगह बनानी चाहिए जहाँ पेड़-पौधे हों, तथा साफ पानी के लिए हैण्डपम्प या सबमर्शिबल मशीन और गर्मियों से बचाने के लिए कूलर या पंखा की व्यवस्था होनी चाहिए. क्योंकि जितना अधिक पशु स्वस्थ रहेंगे दूध का उत्पादन उतना ही अधिक होगा.

धुंध शीतलन प्रणाली

पशुशाला में अत्यधिक तापमान को नियंत्रित करने के लिए धुंध शीतलन प्रणाली पशुशाला के भीतर तापमान को मेंटनेंस रखने के लिए बहुत ही लाभकारी है. इस उपकरण का प्रयोग करके फार्म में उपस्थित तपती गर्मी की तनाव की समस्या को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है.

हरा चारा काटने की मशीन

पशुओं को हरा चारा बहुत ही प्रिय होता है. हरा चारा खिलने से दुग्ध का उत्पादन बढ़ जाता है. ऐसे में हरे फसलों के अवशेषों, हरी घास, बरसीम इत्यादि को बारीक़ काटने के लिए चारा काटने की मशीन की जरुरत होती है. इसे किसान हाथ से संचालित कर सकते हैं. अन्य उपकरणों की तरह यह मशीन भी डेयरी फार्मिंग में बहुत उपयोगी है.

फीड ग्राइंडर यंत्र

पशुओं को संतुलित आहार खिलाने के लिए अनाजों को आधे बारीक ग्राइंडर करके खिलाने से पशु स्वस्थ रहते हैं. इसके लिए पशुपालक भाइयों के पास अनाज फीड ग्राइंडर यंत्र रखने की जरुरत होती है.

भूसा बनाने वाली मशीन

कभी-कभी खेतों में उगे फसलों के अवशेष सुखाकर कठोर हो जाते हैं जैसे- मक्का, बाजरा, ज्वार, पाल इत्यादि इन अवशेषों की भूसा बनाने वाली मशीन से कटाई करके इनका भूसा तैयार किया जाता है जो पशुओं को हरे चारे के साथ मिक्स करके खिलाया जाता है.

दूध दुहने की मशीन

पहले हमारे देश में इतनी सुविधाएँ नहीं तब पशुपालक हाथ से पशुओं का दूध दुहते थे. आज भी हाथ से ही दूध निकाला जाता है लेकिन जिन पशुपालक अधिक पशुओं का पालन करते हैं उनको हाथ से दूध निकालने में अधिक समय के साथ मेहनत भी लगती है. ऐसे में पशुपालकों के लिए दूध दुहने की मशीन बहुत ही आरामदायक है. इस मशीन में मोटर लगा होता है जो वैक्यूम पम्प में लगे नाली के माध्यम से दूध निकालने का काम करता है.

दूध रखने का बालटा

पशुओं के दूध को दुहने के बाद इनके सुरक्षित रखने के लिए इस्टिल या प्लास्टिक का बालटा की जर्य्रत होती है. उनकी खासियत यह होती है की इसमें दूध लम्बे समय तक ताजा और सुरक्षित रहते हैं.

दूध सेपरेटर

इसका उपयोग दूध उत्पाद जैसे- छाछ, दही, मक्खन धी बनाने में किया जाता है. विभाजक हैंडल का मैनुअल रोटेशन वर्म गियर तंत्र को बदल देता है जिससे विभाजक कटोरा स्पिन हो जाता है। जब विभाजक काता जाता है, तो भारी दूध उसकी दीवारों के खिलाफ बाहर की ओर खींचा जाता है और क्रीम, जो हल्का होता है, बीच में इकट्ठा हो जाता है। क्रीम और दूध फिर अलग-अलग टोंटी निकलते हैं.

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