[100%] बंजर जमीन को उपजाऊ कैसे बनाएं | Mitti ko upjau kaise banaye

बंजर जमीन को उपजाऊ कैसे बनाएं | Mitti ko upjau kaise banaye

बंजर जमीन को उपजाऊ कैसे बनाएं- मिट्टी चाहे गमले की हो या खेत की हो, मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए बोरोन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, आयरन, जिंक, कॉपर की आवश्यकता तो होती ही है साथ ही गोबर की खाद, कंपोस्ट खाद या हरी खाद, मुर्गियों की खाद की भी आवश्यकता होती है.

कहते हैं कि धरती हमारी माता है क्योंकि इसी धरती पर हम अपना जीवन ब्यतीत करते हैं और इसी धरती से हमें अन्न और जल भी मिलता है। अब एक किसान की दृष्टि से देखें तो इसी धरती पर खेत बनाकर सब्जियां, अनाज, दालें, फूल और फल इत्यादि प्राप्त करते हैं। ऐसे में किसान भाइयों को चाहिए कि खेत की मिट्टी को उपजाऊ बनाएं रखें।

तो किसान भाइयों आज हम आपको आपके खेत की मिट्टी को उपजाऊ बनाने के कौन-कौन से तरीके हैं और बंजर जमीन को उपजाऊ कैसे बनाएं तथा मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए क्या करना चाहिए, इसके बारे में विस्तार से जानकारी देने जा रहे हैं। आशा करता हूँ कि आपको यह जानकारी अच्छी लगेगी यदि आपको यह पोस्ट अच्छी लगे तो इसे शेयर जरूर करें।

खेत की जमीन या बंजर जमीन को उपजाऊ कैसे बनाएं

1. मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए हरी खाद के उपयोग

हरी खाद के लिए ढैंचा की फसल

खेत की मिट्टी को लंबे समय तक उपजाऊ बनाने रखने के लिए बारिश के मौसम में ढैंचा की फसल की बुआई करें। बुआई करने के लगभग 40 से 45 दिन के बाद जब पौधे थोड़े बड़े हो जाय तब पौधों की बीच में से हँसुआ की सहायता से कटाई कर दें उसके बाद उस खेत मे रोटावेटर से खेत की जुताई कर दें।

खेत की जुताई करने के बाद उस खेत की अच्छी तरह से मेड़बंदी करके उसमें पानी भर दें और प्रति एकड़ खेत में 80 किलो यूरिया डाल दे, यूरिया डालने से हरी खाद अच्छी तरह से और जल्दी सड़ते हैं। इस बात का ध्यान रहे कि 4 से 5 दिन तक खेत मे पानी भरा रहना चाहिए.

सनई का उपयोग

mitti ko upjau बनाने के लिए ढैंचा की तरह सनई की भी हरी खाद खेत के लिए अच्छी मानी जाती है जून के समय खाली परती खेत में सनई की बुआई कर देनी चाहिए। उसके बाद 30 से 35 दिन बाद खेत मे रोटावेटर से जुताई कर दें, फिर उसमें यूरिया की टापड्रेसिंग करके पानी भर देना चाहिए.

2. फसलों एवं सब्जियों के बचे अवशेषों की खेतों में जुताई

एक समय था जब रोटावेटर नहीं था उस समय किसान लोग सब्जियों, फूलों और बहुत से अनाज वाली फसलों की पूरी तुड़ाई और कटाई करने के बाद खेत में ही जला दिया करते थे। तथा आज भी बहोत से किसान ऐसा ही करते हैं लेकिन आपको बता दें कि खेतों में फसलों के बचे हुए अवशेष को इस तरह खेतों में जलाने से खेत की उर्वराशक्ति खत्म हो जाती है।

इसलिए किसान को चाहिए कि फसलों के बचे हुए अवशेष जैसे- गेंदा के पौधे, मक्का के पौधे, उर्द, मूंग, टमाटर, लौकी, खीरा, नेनुआ, गोभी इत्यादि के पौधों की कटाई और तुड़ाई करने के बाद बचे हुए अवशेष को रोटावेटर की सहायता से खेत में ही जुताई कर देनी चाहिए।

3. खेत की मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए देशी खाद का प्रयोग

गोबर की खाद का उपयोग

खेत की मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए गाय, भैंस या बैल के गोबर को किसी स्थान पर 3 फिट गड्ढे की खुदाई करके इकट्ठा कर लेनी चाहिए। और उसमें समय समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए। फि 4 से 5 महीने बाद जब खाद अच्छी तरह सड़कर तैयार हो जाए, तब खाली खेत में बिखेर कर मिट्टी पलटने वाले हल से खेत की जुताई कर देनी चाहिए।

मुर्गियों के खाद(चिकन खाद)

आजकल किसान मुर्गी फार्म से मुर्गी निकलने के बाद फार्म में बचे उनके मल मूत्र को देशी खाद के रूप में प्रयोग कर रहे हैं। लेकिन किसान गलती यह कर रहे हैं कि फार्म से खाद निकलने के बाद खेत मे बिखेर देते हैं।

आपको बता दें कि फार्म से तुरंत निकाला गया खाद कच्चा होता है। कच्ची देशी खाद खेत मे डालने से भूमि में दीमक और मिट्टी में रहने वाले कीड़ों की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए मुर्गियों के इन खादों को लगभग 6 महीने तक अच्छी तरह से सड़कर तैयार हो जाने दें। इसके बाद ही खेतों में उपयोग करें।

बकरी और भेंड़ के खाद

खेत को उपजाऊ बनाने के लिए भेड़ और बकरी के खाद को भी खेतों में डाला जा सकता है। देखा गया है कि गाँव मे रहने वाले किसान अपने खाली खेतों में रात के समय भेंड़ और बकरियों के झुंड को रखते हैं। जिससे रात भर उनकी मल-मूत्र खेत मे देशी खाद के रूप में काम करती है।

नीम की खली

नीम की खली भी पौधों के लिये खाद का काम करती है. मिट्टी में नीम की खली डालने से मिट्टी अधिक उपजाऊ तो होती ही है साथ ही अनेक प्रकार के मिट्टी में रहने वाले कीड़े को भी दूर रखती है. नीम की खली से मिट्टी को अधिक उपजाऊ बनाने के लिए खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए. एक बीघा खेत में 50 से 70 किलो नीम की खली डालनी चाहिए.

सरसों की खली

खेत मे सरसों की खली डालने से न केवल खेत की मिट्टी उपजाऊ होती है बल्कि अनेक प्रकार के रोग और कीटों से भी छुटकारा मिलता है। सरसों की खली आपको आजके क्षेत्र में जहाँ सरसों से तेल निकाला जाता है वहाँ बहुत आसानी से मिल जाएगी.

इस पोस्ट में क्या है

किसान भाइयों आज के इस पोस्ट में हमने आपको खेत की मिट्टी को उपजाऊ कैसे बनाएं(mitti ko upjau kaise banaye), उपजाऊ मिट्टी कैसे तैयार की जाती है और भूमि को उपजाऊ कैसे बनाये की लम्बे समय तक भूमि कृषि योग्य बनी रहे इसी के बारे में जानकारी दिया है. तो दोस्तों मिलते हैं किसी और खेतीबाड़ी सी जुड़ी जानकारी के साथ तब तक के लिए “जय श्रीमन नारायण”.

FAQ:

प्रश्न1. खेत की मिट्टी को उपजाऊ बनाने के कौन कौन से तरीके हैं?

उत्तर. ढैंचा की बुआई, सनई की खाद, फसलों एवं सब्जियों के बचे अवशेष की खेतो में जुताई, गोबर की खाद का उपयोग, मुर्गियों के खाद का उपयोग इत्यादि.

प्रश्न2. भूमि की उर्वरता बढ़ाने के लिए कौन सी फसल उगाई जाती है?

उत्तर. भूमि की उर्वरता शक्ति को बढ़ाने के लिए सनई, ढैंचा, मक्का, बाजरा, लोबिया, मूंग, ग्वार इत्यादि फसलों की फसल चक्र अपनाकर बुआई करनी चाहिए.

प्रश्न3. बंजर भूमि को कैसे सुधारें?

उत्तर. गोबर की खाद, कंपोस्ट खाद या हरी खाद, मुर्गियों की खाद का प्रयोग करें.

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