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बैंगन का लघु पर्ण रोग | बैगन की पत्ती का छोटा होना क्या कारण है

बैंगन का लघु पर्ण रोग | बैगन की पत्ती का छोटा होना क्या कारण है

बैंगन की खेती में बैंगन का लघु पर्ण रोग(बंझा रोग) एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है. इस रोग के आक्रमण से किसान भाइयों को बहुत अधिक नुकसान होता है. अभी तक बैगन में छोटी पत्ती रोग के लिए कोई भी रासायनिक दवा नहीं बनाया गया है. फिर भी कृषि की दुकान पर अनेक प्रकार के रासायनिक दवा बैंगन के पौधे को बंझा होने से रोकने के लिए से मिलते हैं. और किसान भाई उनकी पौधों पर छिडकाव भी करते हैं.

लेकिन उनके स्प्रे करने से भी बंझा रोग पर कोई फर्क नहीं पड़ता है, और देखते ही देखते बैंगन की पूरी प्लांट बंझा रोग से ग्रसित हो जाती है. इस प्रकार किसानों को बीज से लेकर खेत की जुताई, खाद, पानी, मेहनत, मजदूरी और दवा के छिड़काव तक लगने वाली लागत ब्यर्थ हो जाती है. लेकिन अगर आप इस पोस्ट में बताई गई बातों को अपनाएंगे तो बैगन में बांझपन रोग से आप अपनी फसलों को जरुर बचा पाएंगे.

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको बैगन का छोटी पत्ती रोग होने से कैसे रोके और और इन्हें रोकने के बारे में जानकारी देने जा रहे है. दोस्तों बैंगन के पौधे को बंझा होने से रोकने की यह विधि मैंने अपने एक्सपीरिंअन्स से ढूंढा है. मैं स्वयं एक किसान हूँ और 2009 से सब्जियों की खेती कर रहा हूँ, और बैंगन के पौधे को बंझा होने से रोकने की यह जानकरी शेयर करने जा रहा अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगे तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें.

बैंगन का लघु पर्ण रोग के लक्षण

  • पौधे की रोपाई के बाद जब फूल आने की अवस्था होती तब कहीं-कहीं छोटी पत्ती रोग की शुरुआत होती है.
  • पत्तियां नीम की पत्ती से भी छोटी हो जाती हैं.
  • संक्रमित पौधों का विकास पूरी तरह रूक जाता है.
  • छोटी पत्ती रोग से संक्रमित पौधों में फूल तो आते हैं पर फल नहीं लगते हैं.
  • अगर फल लग भी जाते हैं तो फल बहुत छोटे एवं कठोर हो जाते हैं. जो खाने के लायक नहीं होते.

बैंगन के पौधे को बंझा होने से कैसे रोके

बैगन में बांझपन रोग की समस्या से निपटने के लिए किसान भाइयों को कुछ जरुरी बातों को ध्यान में रखना बहुत जरुरी है जो हमने इस पोस्ट में बता रखा है. अगर आप बैगन में छोटी पत्ती रोग से परेशान हैं तो यह पोस्ट आप पूरा अंत तक जरुर पढ़ें.

नर्सरी में करें पौधे की देखभाल

बैंगन की खेती करने से पहले बैंगन के पौधे को नरसरी से मुख्य खेत में लगाने से पहले नर्सरी में बैंगन के पौधे की देखभाल करनी बहोत ही आवश्यक है. बैंगन के पौधे को बंझा होने का एक यह भी कारण है की हो सकता है आप बहुत बड़े पौधे की रोपाई करते होंगे. इसलिए आप जब भी बैगन के पौधे को नरसरी से मुख्य खेत में लगाने जाएँ 35 से 45 दिन के पौधे की ही रोपाई करे. साथ ही बैंगन के पौधे की रोपाई करने से पहले नर्सरी में एक सप्ताह पहले पानी देना बंद कर दे, इससे यह होता है की बैंगन के पौधे और पौधे की जड़ें मजबूत हो जाती हैं.

उचित दुरी पर करें रोपाई

बैंगन के पौधे में बंझा रोग होने का सबसे मुख्य कारण होता है पौधों को उचित दूरी पर न लगाना. दोस्तों आपने देखा होगा की बैंगन के पौधे मुख्य खेत में लगने के बाद जब पौधे में फल और फूल आने का समय होता है. तभी बैंगन का लघु पर्ण रोग की समस्या देखने को मिलती है. इसी समय बंझा होने का प्रकोप बहुत तेजी से होता है. और किसान छोटी पत्ती वाले इस बांझपन रोग से बचने के लिए तरह-तरह के रसायनों का छिड़काव करते हैं और उनको कोई रिजल्ट नहीं मिलता है.

बैंगन के इस बंझा रोग को रोकने का हमने देशी तरीका यह निकाला है की आप जब भी बैंगन का पौधा अपने खेत में लगायें इतने दूर लगायें की बैंगन के लाइन से लाइन के पौधों की पत्तियां बैगन की पूरी बढ़वार होने पर भी आपस में एक दुसरे को छूने न पायें. इसके अलावा जैसा की हमने बताया की जब पौधे में फल और फूल आने का समय होता है. तभी बैंगन के पौधे में बंझा रोग की समस्या देखने को मिलती है. इसका कारण यह है की, जैसे-जैसे बैगन के पौधे बढ़ते हैं वैसे-वैसे पौधों की जड़ों का भी विकास होता है. और यदि बैंगन के पौधे कम दुरी पर रहेंगे तो जब पौधे बड़े होंगे तब उनकी जड़ें आपस में मिलेंगी जिससे बैगन में बांझपन की सम्भावना बढ़ जाती है.

अतः बैंगन के पौधे में बंझा रोग होने का सबसे बड़ा कारण है पौधे से पौधे की दुरी. बांझपन जैसे भयानक रोग से बैंगन की फसल को बचाने के लिए बैंगन के पौधों को इतनी दूरी पर लगायें की बैंगन की जड़ें एक दुसरे को छूने न पायें.

उचित मात्रा में सिंचाई

ज्यादातर किसान भाई अपने फसलों की सिंचाई पुराने तरीके से करते हैं. और देखा जाता है की बैगन की जीतनी ऊँची मेंड़ होती है उतनी पानी खेत में भर देते हैं. और देखा जाता है की 5 से 8 घंटे या 1 दिन तक खेतों में पानी डूबा रहता है. काफी लोगों को पता नहीं होता की फसलों को अधिक पानी देने से तरह-तरह के रोग लगते हैं. जैसे-

  • पत्तियां पिली पड़ने लगती हैं.
  • जड़ें सड़ने लगती हैं.
  • पौधों पर फूल नहीं टिकते.
  • पौधों की जड़ों तथा टहनियों में फंगस लगने लगते है.
  • पौधे अधिक बढ़ते है.
  • रोग अधिक लगते हैं.

ऐसी बहोत सी बीमारियाँ एक साथ लगने की सम्भावना रहती है, इसलिए फसल चाहे कोई भी हो फसलों को पानी इतनी देना चाहिए की सिंचाई करने के 30 मिनट के अंदर पानी खेत में इकट्ठा दिखाई न दे, और मिट्टी द्वारा सोख लिया जाय.

निराई-गुड़ाई

कुछ लोग कहते हैं की जड़ों में गांठे बनने लगती हैं जिसके वजह से बैंगन का लघु पर्ण रोग(बांझपन रोग) होती है. इसलिए बैंगन के पौधे को बंझा होने से रोकने के लिए ये गुड़ाई वाली आईडिया भी बहुत बेहतर है. इसके लिए बैंगन के पौधे के चारो और कुदार की सहायता से 3 से 4 गुड़ाई करनी है इससे जड़ें बहोत दूर तक जाती हैं. और जड़ों में गांठें नहीं बनती हैं.

बैगन में खाद देने का सही तरीका

जब पौधे छोटे होते हैं तो किसान गलती यह करते हैं की पौधों को पहली बार मिट्टी चढ़ाते समय पौधों के पास रासायनिक खाद देकर मिट्टी लगाते हैं. जिससे पौधे की जड़ें वहीं पर सिमित हो जाती हैं. तो इस बात का ध्यान रहे की बैंगन के पौधों को खाद(brinjal plant fertilizer) देते समय एक फिट की दुरी पर खाद दें. इससे पौधों की जड़ें दूर तक जाएँगी और बैंगन की छोटी पत्ती रोग से आप फसल को बचा पाएंगे.

कीटनाशकों का सही छिड़काव

एक ही रासायनिक कीटनाशक का छिड़काव बार-बार लगातार न करें. बैंगन में कई तरह के कीट पौधों और फलों को पहुंचाते हैं और उनके प्रकोप से फसलों की रक्षा के लिए किसान भाई एक ही रसायन का छिड़काव करते हैं. लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए. आप जब भी बैंगन में रासायनिक दवाओं का छिडकाव करें दवाओं को बदलते रहें. और बैंगन के पौधे में बंझा रोग को रोकने के लिए अच्छे फफूंद नाशक रसायन का छिड़काव भी करते रहें.

खेतों की साफ-सफाई का रखें ध्यान

समय रहते फालतू के खरपतवार को खुरपी की सहायता से निकाल देना चाहिए. इनके वजह से भी कई तरह के रोग और कीट बैंगन की फसल में लगते हैं. इसलिए बैगन की खेती में साफ-सफाई का खास ध्यान दें, खेत में निकाई गुड़ाई करने से पौधों की जड़ों में हवा का संचार बना रहता है जिससे पौधे स्वस्थ रहते हैं.

फसल चक्र अपनाएं

अगर आपके खेत में plant of brinjal बंझा हो रहा है तो इसका एक सबसे बड़ा कारण यह है की फसल चक्र अपनाएं और एक ही खेत में बार-बार एक ही फसल की खेती न करे. तथा जिस खेत में टमाटर की खेती, मिर्च की खेती, भिन्डी की खेती हुई हो उसमें बैगन की खेती भूलकर भी न करें.

बैंगन के उन्नत बीज का चुनाव

बैंगन के पौधे को बंझा होने से से रोकने के लिए अच्छे एवं उन्नतशील बैंगन के बीजों की नर्सरी डालकर पौध तैयार करके पौधे की रोपाई करनी चाहिए. और हो सके तो अच्छे हाइब्रिड बीजों का चयन करें.

बैंगन में फल-फूल की दवा

बैंगन फसल से अधिक उपज लेने के लिए हमारे बहुत से किसान भाई बैंगन में फल आने की दवा का छिड़काव अंधाधुंध करते हैं. लेकिन हम आपको बता दें, की बैगन में फल फूल की दवा का छिड़काव उस वक्त करें जब बैंगन की पौधे से कम से कम दो तुड़ाई कर लें. यदि आप बैंगन की खेती की फसल में फूल आने से पहले ही फल फूल की रासायनिक दवा का छिडकाव करते हैं तो इस कारण भी बैंगन में बैगन का छोटी पत्ती रोग होने की सम्भावना होती है.

FAQ.

Q1. बैंगन में कौन कौन से रोग लगते हैं?

ANS. बैंगन में तना छेदक, फली छेदक, बैंगन की छोटी पत्ती का होना, सफ़ेद मक्खी का प्रकोप, माईट आदि रोग होते हैं.

Q2. बैंगन का पौधा क्यों सूखता है?

ANS. बैंगन में की फसल में सिंचाई अधिक न करें और 10 दिनों के अन्तराल पर मेरिवान, लूना या कस्टोडिया फफूंद नाशक रसायन का अदल-बदल का छिड़काव करें. बैंगन का पौधा फोमोप्सिस वेकसेंस नामक फफूंद के कारण सूखता है.

Q3. बैंगन पर planofix का उपयोग कब से करे?

ANS. बैंगन की फसल पर planofix का उपयोग तब किया जाता है जब पौधे का विकास ठीक से न हो रहा हो, इसके अलावा से पौधा हराभरा रहता है साथ ही फसल उत्पादन में भी वृद्धि करता है.

Q4. बैंगन कितने दिन में फल देता है?

ANS. रोपाई के 2 महीने बाद .

Q5. बैंगन की खेती कब होती है?

ANS. यह एक ऐसी सब्जी है जिसकी खेती पुरे वर्ष की जाती है.

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