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फसलों को अवारा पशुओं से बचाने के लिए अपनाएं यह आसान तरीका

हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है और यहाँ की अधिकांश आबादी कृषि पर ही निर्भर है. लेकिन आज के समय फसलों में अनेक प्रकार के रोग, कीट और बीमारियाँ लगती है. और हर तरह के समस्याओं से निपटने के लिए कृषि वज्ञानिक रातो-दिन रिसर्च करते रहते हैं. और तरह-तरह के रासायनिक, जैविक एवं ऑर्गेनिक दवाओं की खोज करते रहते हैं.

परन्तु किसान भाइयों की फसलों को आज के समय अगर सबसे अधिक नुकसान है तो जंगली जानवर नीलगाय से होता है. जंगली animals भी कई तरह के होते हैं जैसे- नीलगाय, जंगली सूअर, सियार इत्यादि. परन्तु जंगली सूअर और सियार तो सभी जगह नहीं होते लेकिन नीलगाय का प्रकोप इतना बढ़ गया है की ये अब गाँव के किसानों को भी चैन की नींद नहीं सोने देते हैं.

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2 नीलगाय क्या खाते हैं

नील गाय कहाँ रहते है

अगर गाँव की बात करें तो ये दिन के समय अपने आप को छुपाने की कोशिश करते हैं. इसके लिए यह गन्ने की खेत में, सर्दियों में रहर की खेती में, पोखरों पर झंखाड़ीयों में या ऐसे स्थानों पर रहते हैं जहाँ इनको पीने के लिए पानी मिलता हो. जैसे- वनों में, गाँव में जहाँ पोखरा रहता है, नदियों और तालाबों के आस-पास अपना डेरा डालते हैं.

नीलगाय क्या खाते हैं

नीलगाय एक शाकाहारी जंगली पशु है. यह अपना पेट भरने के लिए की जीव को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं, पहले ये जंगली जानवर नीलगाय मिर्च और गेंदा का फूल छोड़कर सभी फसलों को खाया करते थे. लेकिन अब मिर्च और फूलों को भी खाने लगे हैं. इसलिए बहुत से किसान इनसे अपनी फसलों को बचाने के लिए अब अपने खेतों की तारबंदी करके current marne wali machine लगा रहे हैं.

जिससे इनको आजादी थोड़ी कम मिलती है ऐसे में अब ये सभी तरह के फसलों को खाने लगे हैं.

अगर इनके मनपसंद फसल की बात करें तो ये सबसे अधिक- कोहड़ा, भिन्डी, बोड़ा(लोबिया), मटर, टमाटर, रहर, बैंगन, मक्का, मुंग, उर्द ये सब फसलें थोड़ी ही देर में चत कर जाते हैं. लेकिन जमीन के अन्दर होने वाली सब्जियां जंगली नीलगाय नहीं खाती है.

बहुत से किसान इनके प्रकोप के कारण खड़ी फसल वाली सब्जियाँ और बेल वाली सब्जियों को लगाना ही बंद कर दिए हैं.

नीलगाय की आवाज कैसी होती है

सभी जंगली जानवरों में मात्र nilgai एक ऐसा जंगली पशु है जो बहुत ही धीमी आवाज में बोलता है. बहुत कम ही ऐसे लोग होंगे जो नीलगाय का आवाज सुने होंगे. इसकी आवाज इतनी कम होती है की रात के सन्नाटे में ही इसके आवाज को सुना जा सकता है.

ये रात के समय ही अपने ग्रुप को ढूढ़ने के लिए जरुरत पड़ने पर अपनी आवाज को निकालते हैं. लेकिन मादा नीलगाय की आवाज नर नीलगाय की तुलना में अधिक होती है. मादा नीलगाय गाँव में रहने वाली भैंस की तरह हल्की आवाज में बोलती है.

नीलगाय को भगाने की दवा | nilgai bhagane ki dawai

किसान भाइयों वैसे तो नील गाय भगाने की दवा अनेक प्रकार की है और नीलगाय से फसल को बचाने के तरीके भी बहुत है. जैसे- खेत में कांटेदार तार से तारबंदी करके, बांस से खेत को चारो और से बांध कर इत्यादि लेकिन किसान के इतने प्रयास के बाद भी नीलगाय से फसलों को बचाना मुश्किल हो रहा है.

लेकिन किसान भाइयों को इस समस्या से बचने के लिए नीलगाय भगाने का दवा बाजार में आ चुका है. जो कृषि की दुकानों पर सुरक्षा, तार, नील रतन इत्यादि नाम से बिकते हैं. यह घोल होता है, इनमे से किसी एक दवा का 25 ml प्रति 15 लीटर पानी में घोल बनाकर शाम के समय फसलों पर 1 सप्ताह के अंतराल पर छिड़काव करना होता है.

अभी तक हमने जो जंगली जानवर भगाने का तरीका दवा के छिड़काव से आपको बताया है यह केवल जंगली नीलगाय के लिए है. ये जंगली सुअर भगाने की दवा नहीं है.

इसलिए यदि आप नीलगाय के साथ सूअर तथा अन्य सभी जानवरों से खेतीबाड़ी की रक्षा करना चाहते हैं तो आपको solar zatka machine लेनी चाहिए. यह बहुत अच्छी सुअर भगाने की मशीन है.

ऐसे करें नीलगाय भगाने की दवा का छिड़काव

nilgai bhagane ki dawai का फसलों को छिडकाव करने से पहले इस बात का ध्यान दे की जिस स्प्रे करने वाली मशीन से आप दवा का फसलों पर स्प्रे करने जा रहे हैं. उस स्प्रे मशीन से किसी भी कीटनाशक या फफूंदनाशक का छिड़काव न किया गया हो,

यदि छिड़काव किया गया है तो उस स्प्रे-मशीन को कपड़े धोने वाले पाउडर से अच्छी तरह धो लें उसके बाद ही nilgai bhagane ki dawa का फसलों पर छिड़काव करें. यदि वैसे ही कीटनाशक लगे हुए मशीन से स्प्रे कर दिया जाय तो नीलगाय को भगाने की दवा काम नहीं करेगी.

दवा छिड़कने से नीलगाय क्यों भागते हैं दूर

सुरक्षा, तार या नील रतन नीलगाय भगाने की इस दवा में एक ऐसा केमिकल होता है जो नमक की तरह स्वाद का होता है. आपको बता दें की नीलगाय एक ऐसा जंगली प्राणी है जो नमक नहीं खाता है इसलिए इन दवाओं का छिड़काव करने से उस फसल को इनसे कोई हानि नहीं होती है.

खेत से जंगली जानवर भगाने का देसी जुगाड़ | nilgai bhagane ka desi jugaad

गाँव में रहने वाले अधिकांश किसान जो खेती बाड़ी करते हैं वे अपनी फसलों को नीलगाय से बचाने के लिए लकड़ी की राख का उपयोग करते हैं. या घर में खाना बनने के बाद चूल्हे की बची हुई राख उपयोग में लेते है.

गाँव के किसान इन राख के साथ फोरेट का उपयोग करते हैं. ये किसान राख में दानेदार फोरेट को मिलाकर सुबह के समय जब फसलों में जब ओस अधिक होता है उस समय इसका बुरकाव करते हैं. जिससे ये ओस के कारण पत्तियों में चिपक जाता है और जंगली जानवर इसे नहीं खाते हैं.

यह नीलगाय को भगाने का देसी जुगाड़ जो हमने आपको बताया केवल 1सप्तह के लिए काम करता है इसके बाद फिर इनका बुरकाव करना पड़ता है.

नीलगाय भगाने का देसी जुगाड़

neel animal यानि नीलगाय से फसलों की सुरक्षा के लिए किसान अपने घर पर ऑर्गेनिक हर्बल घोल भी तैयार कर सकते हैं. इसे बनाने के लिए कहीं भी भटकने की जरुरत नहीं है. घर पर हर्बल घोल तैयार करने के लिए सबसे पहले गया या भैंस के ताजे कच्चे गोबर को मुर्गीयों की खाद में अच्छी तरह मिक्स करके बारीक मिश्रम बना लेना चाहिए.

इसके बाद कच्चे गोबर और मुर्गीयों की खाद से बने मिश्रण में सड़ी हुई सब्जियों के पत्तियों को भी मिला लेना चाहिए. फिर गाय के मूत्र में इन मिश्रण का गाढ़ा घोल तैयार कर लेना है. अब इस घोल को झाड़ू या नीम की टहनियों से फसलों के आस-पास 15 से 20 दिनों के अन्तराल पर छिड़काव करना चाहिए.

हरबोलिव प्लस दवा की दुर्गध से खेतों की देखभाल

यह नीलगाय को भगाने का तरीका भी किसानों के लिए काफी लाभदायक है. बहुत से किसान इंटरनेट से जानकारी लेकर जंगली जानवर की दवा के रूप में हरबोलिव प्लस दवा का प्रयोग भी कर रहे हैं. इसमे कुछ बदबूदार दुर्गन्ध निकलती है जिससे जानवर खेतों के पास नहीं आते.

यह पूर्ण रूप से ऑर्गेनिक है जिस प्रकार किसान अपने खेतों में रसायनों का छिड़काव करते हैं उसी तरह हरबोलिव प्लस दवा का भी फसलों पर छिड़काव किया जाता है. तकनीकि विशेषज्ञ के मुताबिक खेतों में हरबोलिव प्लस दवा के छिड़काव करने से इसमें निकलने वाले दुर्गन्ध के कारण जंगली जानवर तो खेतों से दूर रहते ही हैं. साथ ही इसका खेतों में छिड़काव करने से फसलों की पैदावार में बढ़ोत्तरी होती है और खेत की मिट्टी उपजाऊ भी होती है.

खेत से जानवर भगाने के उपाय

farm animal से फसल की सुरक्षा के लिए आप ऊपर दिए गये जंगली जानवर भगाने की दवाओं का स्प्रे अपनी फसलों पर कर सकते हैं. बरसात के दिनों में इन दवाओं का असर नहीं देखने को मिलेगा क्योंकि इन दिनों बारिश के कारण दवा धुल जाते हैं.

ऐसे में यदि आप अपने खेत की फसलों को नीलगाय ही नहीं बल्कि सभी जंगली जानवरों जैसे- नीलगाय, जंगली सूअर, बन्दर, कुत्ता, सियार इत्यादि से 24*7 दिन सुरक्षित रखना चाहते हैं तो, आपको current wali machine यानि झटका वाली मशीन लगानी होगी.

सोलर जटका मशीन kheti ke liye jhatka machine

अगर हम झटका मशीन की प्राइस की बात करें तो यह आपको 3000 से लेकर 5000 रुपये में मिल जाएगी. लेकिन 3000 रूपये वाली नीलगाय भगाने की मशीन में करंट थोड़ी कम आती है. और यह झटका मशीन 4 से 5 एकड़ खेत के लिए ही सिमित रहती है,

जबकि 5000 रुपये वाली electric jhatka machine बहुत हाई बोल्टेज करंट मारती है. और यह jhatka machine 10 एकड़ खेत को कवर करती है.

करंट वाली मशीन से किसको-कितना खतरा

यदि कोई भी किसान भाई अपने खेत में फसलों को बचाने के लिए jhataka wali machine लगाते हैं तो आपको बता दें की इससे न ही किसी जानवर को कोई खतरा है और न ही फसलों और मनुष्यों को,

क्योंकि यह zatka machine केवल करंट मारती है. और एक बार jhataka देने के बाद 3 सेकंड के लिए बंद हो जाती है.

झटका मशीन कहां पर मिलती है

अपने खेत की फसलों को जंगली जानवर से बचाने के लिए अगर आप जटका मशीन लगाना चाहते हैं और यह जानना चाहते हैं की झटका मशीन कहां मिलेगी तो आप ksp solar jhatka machine हरियाणा मोबाईल नंबर 8094638726, 9053238726 पर सम्पर्क कर सकते हैं.

नीलगाय फोटो

तो दोस्तों आज के इस पोस्ट में हमने आपको खेत में नीलगाय को जाने से कैसे रोके, तथा इनको खेत मे जाने से रोकने के लिए किस दवाई का कितनी मात्रा में घोल बनाकर फसलों पर छिड़काव करना चाहिए, नीलगाय क्या खाता है, कहाँ रहता है, कैसे बोलता है इन सबके बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है.

हम आशा करते हैं की आपको यह नीलगाय भगाने का उपाय अच्छा लगा होगा.

यदि आपको यह nilgai bhagane ka desi jugad का तरीका अच्छी लगी हो तो इसे शेयर जरुर करें.

तो दोस्तों मिलते हैं हम किसी और आर्टिकल के साथ तब तक के लिए “जय श्री कृष्ण”.

FAQ:

Q: नीलगाय की उम्र कितनी होती है?

ANS: नीलगाय की औसत आयु 7 से 12 वर्ष होती है.

Q: नीलगाय को कैसे भगाया जाए?

ANS: नीलगाय को भगाने के लिए फसलों पर सुरक्षा, तार या नील रतन दवा का स्प्रे करके या खेत मे झटका मशीन लगाकर भगाया जा सकता है.

Q: नीलगाय कितने प्रकार की होती है?

ANS: मादा नीलगाय भूरे रंग और नर नीलगाय काले रंग दो तरह के होते हैं.

Q: नीलगाय की रफ्तार कितनी होती है?

ANS: एक नीलगाय 5 से 6 फीट ऊँची दीवार या खेत में घेरे गए तार को लाँघ सकती है, और यह 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार दौड़ती है.

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7 COMMENTS

  1. नील गाय =रोजडे
    नाम
    आचार्यपंडितसुन्दरलालसौडियाल शास्त्री हिन्दूधर्मगुरु यूनिट पत्नीश्री अमृतेश्वरीदेवी

  2. जंगली सुअर को भागने। के लिए dawa bataye kyoki jamin ke niche beej kand se lekar fasal ki Anaj ganna tak ko क्षति देती है निदान bataye

    • दवा तो केवल नीलगाय के लिए अगर आप सभी जंगली जानवरों से अपने फसलों को बचाना चाहते हैं तो आप झटका मशीन ले सकते हैं हमने अपने लिए 2 मशीन लिए हैं अधिक जानकारी के लिए झटका मशीन वाला आर्टिकल पढ़ें.

  3. मै यूपी के गोंडा जिले से हूं क्या हमारे पास में कहीं झटका मसीन मिल सकती है जैसे गोंडा,बाराबंकी, फैजाबाद, लखनऊ अगर हां तो फिर इसका मूल्य क्या होगा।

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