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किसान फटाफट निपटा लें जरूरी काम वर्ना मक्का, धान, कपास, अरहर, सोयाबीन की फसल हो जायेंगे बर्बाद

खरीफ में मक्का, धान, कपास, अरहर, सोयाबीन की फसल को जब पकने का समय आता है तब मौसम में भी तेजी से बदलाव होता है. ऐसे में इन सभी फसलों में रोग और कीटों का हमला भी फसलों पर देखने को मिलता है. और इन फसलों को समय रहते बचना बहुत ही जरुरी होता है. तो दोस्तों चलिए हम इस पोस्ट के माध्यम से आपको बताते हैं की खरीफ में लगे फसलों को रोग और कीट से कैसे बचाएं.

किसान फटाफट निपटा लें जरूरी काम वर्ना मक्का, धान, कपास, अरहर, सोयाबीन की फसल हो जायेंगे बर्बाद

मक्का

खरीफ में मक्का की फसल सभी राज्यों में की जाती है. इस सीजन में बारीश का समय होता है जिससे अधिक बरसात होने के तथा तेज हवा चलने के कारण पौधे गिर जाते हैं. इसके लिए किसानों को चाहिए की मक्का की खेती करने के लिए ऐसी भूमि का चुनाव करना चाहिए जहाँ पानी का जलभराव अधिक न होता हो.

इसके अलावा पत्ती खाने वाले कीड़ों का हमला देखने को मिलता है जिसे नियंत्रित करने के लिए बायोAK-57 कीटनाशक 20ml/15 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए. साथ ही फसल में अत्यधिक नमी होने की वजह से पत्तियों तथा डंठल में फंगस का प्रकोप होने से सड़ने-गलने की बीमारी लग जाती है. अगर मक्का में ऐसी स्थिति में सड़न रोग लग जाए तो सबसे पहले ग्रसित पौधों को तथा पत्तियों को खेत से बाहर निकाल देना चाहिए. फिर भी यदि नियंत्रण न हो सके तो बाविस्टिन का घोल बनाकर स्प्रे कर देनी चाहिए.

धान

खरीफ में धान एक ऐसी फसल है जिसे सबसे अधिक पानी की आवश्यकता होती है. धान की खेती में पानी की कमी होने से खरपतवार बहुत तेजी से उग आते हैं जो फसलों को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं. अतः किसान भाइयों को चाहिए की धान को खरपतवार से बचाने के लिए पानी की कमी न होने दें.

धान में दीमक

अब बात आती है धान में दीमक की तो दोस्तों आपको बता दें की धान में दीमक लगने की समस्या के कारण कुछ किसान स्वयं होते हैं. जी हाँ दोस्तों इसका मुख्य कारण यह है की बहुत से किसान अपने खेतों में देशी खाद के रूप में अपने खेतों में गोबर की खाद, मुर्गियों की खाद या बकरियों की खाद का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन गलती यह करते हैं की किसान इन देशी खादों को सड़ने नहीं देते है. और ताजे देशी खाद को अपने खेतों में डाल देते हैं.

तो दोस्तों अगर आपके धान की फसल में दीमक की समस्या हो तो सबसे पहले आप अच्छी तरह से सड़ी हुई खाद का प्रयोग अपने खेतों में करें. और दूसरा कारण यह है की धान के खेत में कहीं-कहीं पानी की कमी होने पर भी दीमक लगने की सम्भावना होती है. अतः धान में नमी हमेशा बनी रहनी चाहिए. इसके बाद भी अगर दीमक की समस्या दिखाई दे तो दानेदार 4G-कार्टेपहाईड्राक्लोराईट को यूरिया में मिलाकर बुरकाव करना चाहिए.

धान में तना छेदक, हिप्सा और ब्लास्ट रोग

धान में यदि तना छेदक कीट का हमला दिखाई दे तो 20 ग्राम कार्टेपहाईड्राक्लोराईट पाउडर का 15 लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करना चाहिए. तथा ब्लास्ट रोग से धान की फसल को बचाने के लिए ट्राईसाइक्लाजोल 10 ग्राम/लिटर पानी में मिलाकर 1 सप्ताह के अन्तराल पर दो बार स्प्रे करना चाहिए. साथ ही हिप्सा रो के कारण भी फसल को काफी हानि होती है. अतः धान में हिप्सा रोग के नियंत्रण के लिए प्रोफेक्स सुपर कीटनाशक का 25ml/15 लीटर पानी में घोल का स्प्रे करना चाहिए.

कपास

खरीफ में कपास की फसल को सबसे अधिक नुकसान सफ़ेद मक्खी और हरी मक्खी से होता है. ये फसल की पत्तियों से रस को चूसकर पौधे को कमजोर बना देते हैं साथ ही सफेद मक्खियाँ वाइरस भी फैलाती हैं. इन कीटों से कपास की फसलो को बचाने के लिए इमिडाक्लोरोपिड 5ml+एसिटामिप्रिड 20 ग्राम/15 लीटर पानी में घोल तैयार करके स्प्रे करना चाहिए.

अरहर

बारिश ख़त्म होने के बाद जब अरहर की फसल में विकास एवं वृद्धि का समय आता है तब पत्ती लपेटक कीट का हमला फसल पर होने लगता है. ये कीट बहुत लम्बे समय तक पत्तियों को लपेटकर उसी में रहते हैं. और जब फूल तथा फलियाँ बनने लगती हैं तब ये उनको भी हानि पहुंचाते हैं. अगर शुरुआत में ही इनकी देखरेख न की जाय तो अरहर की पैदावार काफी कम हो जाती है. ऐसी स्थिति में इन कीटों से फसल को बचाने के लिए महारथी कीटनाशक 1ml/लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए.

अरहर में उकठा रोग

अरहर में उकठा रोग का दो कारण होता है पहला खेतों में अधिक जलभराव और दूसरा खेतों में पर्याप्त नमीं का न होना. अरहर में उकठा रोग एक बहुत ही भयानक और गंभीर बीमारी है. उकठा रोग के इस बीमारी से फसल को बचाने के लिए बीज बुआई से पहले बीजों को उपचारित कर लेना चाहिए. उसके बाद अरहर में खरपतवार लगने पर श्रमिकों की सहायता से खुरपी की मदद से खरपतवार को निकलना चाहिए इससे उनकी जड़ें सुरक्षित रहती हैं और नए जड़ों का विकास बहुत तेजी से होता है.

सोयाबीन

सोयाबीन की फसल में बारिश के सीजन में पीला मोजेक के संक्रमण से पौधे की बढ़वार रूक जाती है और उनकी फलियों में दाने बहुत कम बनते हैं जिससे पैदावार बहुत कम हो जाती है.इसलिए अगर सोयाबीन की फसल में यह रो दिखाई दे तब सबसे पहले संक्रमित पौधों को खेत से उखाड़कर ख़त कहीं दूर फेंक दें या जलाकर नष्ट कर दें. इसके बाद इमिडाक्लोरोपिड 5ml+बायोAK-57 कीटनाशक 20ml/15 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए.

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